वोट चोरी नहीं हो रही, जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया: नरोत्तम मिश्रा का राहुल गांधी पर बड़ा पलटवार

पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि वोट चोरी नहीं हो रही, बल्कि जनता जागरूक हो गई है और उसने चोरों को वोट देना बंद कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी से देश की जनता से माफी मांगने की मांग भी की। मिश्रा ने कांग्रेस की लगातार चुनावी हार, EVM और SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी निशाना साधा।

वोट चोरी नहीं हो रही, जनता ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया: नरोत्तम मिश्रा का राहुल गांधी पर बड़ा पलटवार

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर नरोत्तम मिश्रा का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, बोले- जनता जाग गई है, अब चोरों को वोट देना बंद कर दिया

भोपाल। चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगातार लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस नेता पर तीखा पलटवार किया है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान मिश्रा ने कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि वोट चोरी नहीं हो रहे हैं, बल्कि देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है और उसने चोरों को वोट देना बंद कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी से देश की जनता से माफी मांगने की मांग भी की।

राहुल गांधी हाल के दिनों में एक बार फिर चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ से जुड़े आरोप दोहराए हैं और SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

‘वोट चोरी नहीं, जनता ने वोट देना बंद किया’

डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गांधी के आरोपों को लेकर कहा कि चुनाव में हार-जीत का फैसला जनता करती है। उनके मुताबिक राहुल गांधी को चुनाव परिणामों को स्वीकार करते हुए यह समझना चाहिए कि जनता पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो गई है।

मिश्रा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वोट चोरी होने की बात करने के बजाय राहुल गांधी को जनता के बदलते राजनीतिक रुझान को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने जिसे पसंद नहीं किया, उसे वोट नहीं दिया और इसी वजह से चुनावी परिणाम सामने आए।

उन्होंने राहुल गांधी से देश की जनता से माफी मांगने की मांग भी की। मिश्रा का कहना था कि चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के लिए पर्याप्त आधार और प्रमाण सामने रखना जरूरी है।

‘कभी हाइड्रोजन बम, कभी सुतली बम’

पूर्व गृह मंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार कई चुनावों में पराजित हुई है और ऐसे में अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए नए-नए मुद्दे सामने लाए जाते हैं।

मिश्रा ने कहा कि कभी हाइड्रोजन बम लाने की बात होती है तो कभी सुतली बम की, लेकिन अंत में आरोप फुस्स निकल जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 90 से अधिक चुनाव हार चुकी है।

हालांकि चुनावों की संख्या और उसे किस तरह गिना जाए, इस पर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे और गणनाएं सामने आती रही हैं। इसलिए मिश्रा का यह आंकड़ा उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

EVM के बाद अब SIR पर सवाल, मिश्रा ने उठाया मुद्दा

नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गांधी के पुराने EVM संबंधी आरोपों और अब मतदाता सूची के SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों को जोड़ते हुए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले EVM को लेकर सवाल उठाए गए और अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं।

मिश्रा के मुताबिक यदि पहले लगाए गए आरोपों से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए थे, तो अब उसी तरह SIR को लेकर भी आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पहले भी राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों का खंडन किया है। अगस्त 2025 में आयोग ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता का बचाव करते हुए आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की थी।

राहुल गांधी ने फिर उठाया ‘वोट चोरी’ का मुद्दा

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने सितंबर 2026 में एक बार फिर चुनाव आयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 23 सितंबर को कहा कि ‘वोट चोरी’ भारतीय नागरिकों के अधिकार और संविधान पर सीधा हमला है। इसके बाद 24 सितंबर को भी उन्होंने चुनाव आयोग और SIR को लेकर सवाल उठाए।

राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों को भाजपा और चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया और चुनाव आयोग ने भी आरोपों को स्वीकार नहीं किया।

यानी ‘वोट चोरी’ का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है, जहां कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को खारिज कर रही है।

ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व पर भी बोले मिश्रा

पत्रकारों ने भाजपा में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर भी नरोत्तम मिश्रा से सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि पार्टी में ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व सर्वोच्च स्तर तक है।

मिश्रा ने कहा कि उपमुख्यमंत्री सहित कई मंत्री इस समाज से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी समाज से कितने मंत्री बनाए जाएं, इसके लिए कोई निश्चित पैमाना नहीं होता। उनके अनुसार पार्टी में प्रतिनिधित्व को केवल मंत्रियों की संख्या से नहीं देखा जाना चाहिए।

‘मुझे कोई पद नहीं चाहिए’

चुनाव लड़ने और भविष्य में किसी पद की इच्छा को लेकर पूछे गए सवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उन्हें कोई पद नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पहले भी साफ कर चुके हैं कि वह एक कार्यकर्ता के रूप में काम करना चाहते हैं।

मिश्रा के मुताबिक पार्टी उन्हें लगातार जिम्मेदारियां दे रही है और वह इससे संतुष्ट हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता संगठन के लिए काम करना है, न कि किसी पद की मांग करना।

विजयपुर-दतिया उपचुनाव पर भी दिया जवाब

विजयपुर और दतिया उपचुनाव में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर भी नरोत्तम मिश्रा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी एक जिले या किसी एक उपचुनाव के आधार पर पूरी पार्टी की स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और दोबारा सरकार बनाएगी। मिश्रा ने पार्टी के संगठन और कार्यकर्ताओं की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि चुनाव में भाजपा पूरी मजबूती के साथ मुकाबला करेगी।

‘वोट चोरी’ पर बढ़ी राजनीतिक बहस

राहुल गांधी और नरोत्तम मिश्रा के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

राहुल गांधी की ओर से जहां मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज कर रहे हैं। चुनाव आयोग भी अपने स्तर पर आरोपों का जवाब दे चुका है।

ऐसे में आने वाले समय में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं। फिलहाल नरोत्तम मिश्रा के बयान ने इस विवाद को मध्य प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का नया मुद्दा बना दिया है।