सिविल अस्पताल बड़ामलहरा में टीबी मरीजों को पोषण किट का हुआ वितरण, बीएमओ सहित कर्मचारियों ने किया रक्त दान
बड़ामलहरा सिविल अस्पताल में शनिवार को 50 टीबी मरीजों को पोषण किट और निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया। वहीं, बीएमओ डॉ. हेमंत मरैया ने अपनी पुत्री के NEET में चयन की खुशी में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया, जिसमें उन्होंने स्वयं सहित अस्पताल के कर्मचारियों और युवाओं ने रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।
भारत सरकार की योजना के तहत मरीजों को मिली पोषण किट और निःशुल्क दवाएं
पुत्री के NEET चयन की खुशी में बीएमओ डॉ. हेमंत मरैया ने आयोजित किया रक्तदान शिविर
स्वास्थ्य कर्मचारियों और युवाओं ने रक्तदान कर दिया मानव सेवा का संदेश
बड़ामलहरा। सिविल अस्पताल बड़ामलहरा में शनिवार को सेवा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम देखने को मिला। भारत सरकार की टीबी उन्मूलन अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में 50 टीबी मरीजों को पोषण किट एवं निःशुल्क दवाओं का वितरण किया गया। वहीं, अस्पताल परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया, जिसमें ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. हेमंत मरैया सहित अस्पताल के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराकर उनके उपचार को प्रभावी बनाना तथा समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम के दौरान मौजूद अधिकारियों ने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में नियमित दवा के साथ-साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराई गई, ताकि उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो सके।
शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 50 टीबी मरीजों को पोषण किट प्रदान की गई। किट में मरीजों के लिए आवश्यक पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके। इसके साथ ही सभी मरीजों को चिकित्सकों द्वारा आवश्यक परामर्श दिया गया और उपचार के लिए निःशुल्क दवाओं का भी वितरण किया गया। डॉक्टरों ने मरीजों से दवाओं का नियमित सेवन करने और उपचार बीच में नहीं छोड़ने की अपील की।
इस अवसर पर बीएमओ डॉ. हेमंत मरैया ने बताया कि सरकार का लक्ष्य देश को टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि मरीजों को उचित पोषण और समय-समय पर स्वास्थ्य परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से ही टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण स्वैच्छिक रक्तदान शिविर रहा। बीएमओ डॉ. हेमंत मरैया ने अपनी पुत्री के NEET परीक्षा में चयनित होने की खुशी को समाज सेवा से जोड़ते हुए इस शिविर का आयोजन कराया। उन्होंने स्वयं रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया। उनके इस कदम की उपस्थित लोगों ने सराहना की और इसे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया।
रक्तदान शिविर में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एमपीडब्ल्यू, डेटा एंट्री ऑपरेटर, नर्सिंग स्टाफ तथा अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं और स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने भी शिविर में भाग लेकर रक्तदान किया। सभी रक्तदाताओं का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह किया गया।
शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक यूनिट रक्त कई जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचा सकता है। दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, प्रसव और ऑपरेशन जैसी परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बीएमओ डॉ. हेमंत मरैया की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि व्यक्तिगत खुशी को समाज सेवा से जोड़ना प्रेरणादायक उदाहरण है। इससे अन्य लोगों को भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी टीबी मरीजों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, पोषण सहायता अभियान और रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे। कार्यक्रम के समापन पर सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त किया गया और टीबी मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वास्थ्य संबंधी जनजागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाकर समाज को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने में अपना योगदान देंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस