निजी अस्पताल की लिफ्ट में फंसने से मरीज की दर्दनाक मौत, परिजनों का हंगामा; अस्पताल बंद कराने की मांग, पुलिस पर मारपीट के आरोप

रीवा के एक निजी अस्पताल में लिफ्ट में फंसने से एक मरीज की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है। गुस्साए परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं और अस्पताल को बंद किए जाने की मांग कर रहे हैं।

निजी अस्पताल की लिफ्ट में फंसने से मरीज की दर्दनाक मौत, परिजनों का हंगामा; अस्पताल बंद कराने की मांग, पुलिस पर मारपीट के आरोप

मध्य प्रदेश स्थित रीवा के एक प्राइवेट अस्पताल से दर्दनाक घटना सामने आई है, यहां लिफ्ट में फंसकर एक मरीज की दर्दनाक मौत हो गई. घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया है.

रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में शनिवार देर रात एक निजी अस्पताल में दर्दनाक हादसा हो गया। समान थाना क्षेत्र स्थित निजी अस्पताल में लिफ्ट में फंसने से एक मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अस्पताल को तत्काल बंद कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मृतक के परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन ने लिफ्ट की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समय रहते गंभीरता दिखाई होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पेड़ से गिरने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था

मृतक की पहचान सुरेश सेन के रूप में हुई है। वह अमरपाटन क्षेत्र के लालपुर गांव के निवासी बताए गए हैं। मृतक के बेटे हिमांशु सेन के मुताबिक, कुछ दिन पहले उनके पिता पेड़ से गिर गए थे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और उनके कंधे की हड्डी टूट गई थी। चोट के बाद उनका इलाज कराया जा रहा था।

शनिवार शाम को परिजन सुरेश सेन को बेहतर इलाज के लिए रीवा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद डॉक्टरों द्वारा उनका उपचार किया जा रहा था। परिजनों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन कुछ ही समय बाद अस्पताल में हुए हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।

स्ट्रेचर पर लिफ्ट से ऊपर ले जाया जा रहा था मरीज

मृतक के बेटे हिमांशु सेन ने बताया कि रात के समय अस्पताल का एक कर्मचारी उनके पिता को स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल के ऊपरी हिस्से में ले जा रहा था। मरीज को लिफ्ट के जरिए ऊपर ले जाया जा रहा था।

परिजनों के मुताबिक, वे भी अपने मरीज के साथ लिफ्ट में जाना चाहते थे, लेकिन अस्पताल के कर्मचारी ने उन्हें लिफ्ट में आने से रोक दिया। कर्मचारी ने परिजनों से सीढ़ियों के रास्ते ऊपर जाने के लिए कहा। इसके बाद अस्पताल का कर्मचारी मरीज को लेकर लिफ्ट से ऊपर चला गया, जबकि परिजन सीढ़ियों के रास्ते ऊपर जाने लगे।

यही कुछ क्षण बाद परिवार के लिए सबसे भयावह घटना में बदल गया।

ऊपर पहुंचे तो लिफ्ट में फंसा मिला मरीज

परिजनों का आरोप है कि जब वे सीढ़ियों के रास्ते लिफ्ट के पास पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। सुरेश सेन लिफ्ट के निचले हिस्से में फंसे हुए थे। परिजनों के अनुसार, उनका शरीर लिफ्ट में फंसा था और वह गंभीर अवस्था में थे।

आरोप है कि जिस अस्पताल कर्मचारी के साथ मरीज को लिफ्ट में ले जाया गया था, वह मौके पर मौजूद नहीं था। परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

हादसे की जानकारी मिलते ही अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों और परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग अस्पताल परिसर में जमा हो गए।

परिजनों ने लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

मृतक के बेटे हिमांशु सेन ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि हादसे से करीब 20 मिनट पहले भी एक लड़की इसी लिफ्ट में फंस गई थी।

परिजनों का कहना है कि अगर कुछ समय पहले लिफ्ट में किसी व्यक्ति के फंसने की घटना हुई थी तो उसके बाद अस्पताल प्रबंधन को लिफ्ट का संचालन तत्काल रोक देना चाहिए था और तकनीकी जांच करानी चाहिए थी। इसके बावजूद मरीज को उसी लिफ्ट से ऊपर ले जाया गया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने लिफ्ट की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया और इसी कथित लापरवाही के कारण सुरेश सेन की जान चली गई।

हालांकि, लिफ्ट में पहले किसी अन्य व्यक्ति के फंसने और उसके बाद मरीज को उसी लिफ्ट से ले जाने संबंधी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अस्पताल के बाहर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

मरीज की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को घटना के लिए जिम्मेदार बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। परिजनों ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, अस्पताल की लिफ्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

परिजनों ने अस्पताल को तत्काल बंद करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि जब तक अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच पूरी नहीं होती, तब तक मरीजों की जान को जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए।

परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप

हंगामे के दौरान मृतक के परिजनों ने पुलिस के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का दावा है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की और कुछ लोगों के साथ मारपीट की।

परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को नियंत्रित करने के दौरान उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की और कुछ लोगों को जमीन पर घसीटा गया। इस आरोप को लेकर भी परिजनों में नाराजगी दिखाई दी।

हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पुलिस पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अस्पताल की लिफ्ट में हुई तकनीकी खराबी, मरीज को लिफ्ट से ले जाने की प्रक्रिया, अस्पताल कर्मचारी की भूमिका और घटना के समय मौजूद लोगों के बयान सहित अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

तकनीकी खराबी के कारण गर्दन फंसने की बात सामने आई

घटना को लेकर सीएसपी राजीव पाठक ने बताया कि निजी अस्पताल की लिफ्ट में फंसने से एक व्यक्ति की मौत होने की सूचना पुलिस को मिली थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल भेजा गया है।

सीएसपी के मुताबिक, प्रथम दृष्टया मिली जानकारी में लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण मृतक की गर्दन फंसने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना की वास्तविक वजह और इसमें किसी की लापरवाही थी या नहीं, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि पुलिस मामले से जुड़े सभी आवश्यक साक्ष्य जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद सामने आएगी लापरवाही की असली तस्वीर

रीवा के इस हादसे ने निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और लिफ्ट के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पतालों में मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल आम है। ऐसे में लिफ्ट की नियमित तकनीकी जांच, रखरखाव और संचालन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि परिजनों के आरोप के मुताबिक हादसे से कुछ समय पहले भी कोई व्यक्ति लिफ्ट में फंसा था, तो उसके बाद लिफ्ट को दोबारा मरीज को ले जाने के लिए क्यों इस्तेमाल किया गया? क्या लिफ्ट की तकनीकी जांच की गई थी? मरीज को लिफ्ट में ले जाते समय प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद था या नहीं? इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद सामने आएंगे।

फिलहाल सुरेश सेन की मौत से परिवार सदमे में है। परिजन इसे महज हादसा नहीं बल्कि कथित लापरवाही का परिणाम बता रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।