सहारनपुर में मस्जिद गिराने पर भड़का विरोध, वामपंथी मोर्चा ने राज्यपाल के नाम DM को सौंपा ज्ञापन; कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने और विपक्षी नेताओं की कथित नजरबंदी के विरोध में वामपंथी मोर्चा ने उरई में राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। मोर्चे ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की।
सहारनपुर की मस्जिद कार्रवाई और विपक्षी नेताओं की कथित नजरबंदी पर वामपंथी मोर्चा ने जताया विरोध, प्रदेश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
उरई। सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना और विपक्षी नेताओं को कथित रूप से नजरबंद किए जाने के विरोध में वामपंथी मोर्चा ने मंगलवार को जोरदार आपत्ति दर्ज कराई। मोर्चे के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। मोर्चे ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून के शासन की अनदेखी की जा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं पर भी कार्रवाई की जा रही है।
ज्ञापन में सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई। मोर्चे के पदाधिकारियों का कहना है कि जिस मस्जिद को गिराए जाने की बात सामने आई है, उसका निर्माण वर्ष 1911 में हुआ था। उनके अनुसार इतने पुराने धार्मिक स्थल को गिराने की कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मस्जिद गिराने की कार्रवाई पर उठाए सवाल
वामपंथी मोर्चा ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि सहारनपुर की संबंधित मस्जिद का निर्माण वर्ष 1911 में हुआ था और प्रदेश सरकार को उसे गिराने का अधिकार नहीं था। मोर्चे ने इस कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक और कानूनी आधार पर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, मस्जिद के निर्माण वर्ष, स्वामित्व, भूमि की स्थिति और उसे गिराने की कार्रवाई के कानूनी आधार से संबंधित दस्तावेज या आधिकारिक रिकॉर्ड का विस्तृत विवरण ज्ञापन के साथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मोर्चे का कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। संगठन ने सहारनपुर की घटना को इसी व्यापक सवाल से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
विपक्षी नेताओं की कथित नजरबंदी पर भी नाराजगी
ज्ञापन में वामपंथी मोर्चा ने विपक्षी नेताओं को कथित रूप से घरों में नजरबंद किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। मोर्चे के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और कार्रवाई का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
मोर्चे का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने तथा सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार है। यदि किसी नेता को नजरबंद किया गया है तो इसके पीछे प्रशासनिक या कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि एक तरफ सहारनपुर में मस्जिद गिराने जैसी कार्रवाई सामने आती है और दूसरी ओर विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किया जाता है। मोर्चे ने इन दोनों घटनाओं को प्रदेश में कानून के राज और लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की।
‘जंगलराज’ जैसी स्थिति का लगाया आरोप
वामपंथी मोर्चे के पदाधिकारियों ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश में कानून के शासन की जगह ‘जंगलराज’ जैसी स्थिति बनती जा रही है।
मोर्चे ने कहा कि सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए तथा कानून का पालन समान रूप से हो। संगठन ने धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों और राजनीतिक विरोध के मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता की मांग की।
नेताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना और अपनी असहमति दर्ज कराना नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों का हिस्सा है। ऐसे में विपक्षी नेताओं को कथित रूप से नजरबंद करने की कार्रवाई पर भी सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
राज्यपाल तक पहुंचाई आपत्तियां
वामपंथी मोर्चा ने जिलाधिकारी के माध्यम से अपना ज्ञापन राज्यपाल तक पहुंचाया। ज्ञापन में सहारनपुर की घटना की जांच, विपक्षी नेताओं की कथित नजरबंदी और प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की गई।
मोर्चे का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि सहारनपुर में मस्जिद गिराने की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और प्रशासन ने इसके लिए कौन-सा कानूनी आधार अपनाया। संगठन ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई।
वहीं, विपक्षी नेताओं को नजरबंद किए जाने के आरोपों को लेकर भी मोर्चे ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या प्रदेश सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।
ये लोग रहे मौजूद
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने वालों में विजय सिंह राठौर, ग्रन्थ सिंह कुशवाह, सुधीर अवस्थी, देवेंद्र शुक्ला, देवेश चौरसिया, विनोद कुमार नगरिया, भारत सिंह जाटव और राम सिंह चौधरी सहित वामपंथी मोर्चे के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।
मोर्चे के नेताओं ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने सहारनपुर की घटना सहित प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल स्तर से मामले का संज्ञान लिया जाएगा और संबंधित घटनाओं के संबंध में उचित कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई का प्रशासनिक आधार, संबंधित भूमि और भवन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज तथा कार्रवाई से संबंधित विस्तृत आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसी तरह विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने के आरोपों पर भी संबंधित प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले से जुड़े दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस