सर्वर ठप, साढ़े तीन लाख शिक्षक नहीं कर पाए लॉग-आउट:छतरपुर में ई-अटेंडेंस के लिए छत पर चढ़े शिक्षक, नेटवर्क तलाशते रहे; वेतन कटने के डर से बढ़ी चिंता

शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या पहले से बनी हुई है। इसके चलते ई-अटेंडेंस की प्रक्रिया पूरी करने में अतिरिक्त समय लग जाता है।

सर्वर ठप, साढ़े तीन लाख शिक्षक नहीं कर पाए लॉग-आउट:छतरपुर में ई-अटेंडेंस के लिए छत पर चढ़े शिक्षक, नेटवर्क तलाशते रहे; वेतन कटने के डर से बढ़ी चिंता

छतरपुर जिले में लागू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण शिक्षकों को ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने के लिए स्कूल की छत तक चढ़ना पड़ रहा है।

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था गुरुवार को तकनीकी समस्या के कारण शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन गई। ‘हमारे शिक्षक’ एप के माध्यम से सुबह स्कूल पहुंचने पर लॉग-इन करने वाले प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख शिक्षक शाम तक लॉग-आउट के लिए परेशान होते रहे। सर्वर में आई तकनीकी खराबी के कारण कई शिक्षक निर्धारित समय पर अपनी उपस्थिति प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके।

समस्या इतनी गंभीर रही कि कई स्कूलों में शिक्षक मोबाइल नेटवर्क की तलाश में इधर-उधर घूमते दिखाई दिए। छतरपुर में स्थिति का एक अलग ही दृश्य सामने आया, जहां कुछ शिक्षक बेहतर नेटवर्क मिलने की उम्मीद में स्कूल भवन की छत तक पहुंच गए। कुछ शिक्षकों ने स्कूल परिसर और आसपास के ऊंचे स्थानों पर जाकर मोबाइल से लॉग-आउट करने का प्रयास किया।

सुबह लॉग-इन, शाम तक लॉग-आउट का इंतजार

ई-अटेंडेंस व्यवस्था के तहत शिक्षक सुबह स्कूल पहुंचकर ‘हमारे शिक्षक’ एप पर अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं। इसके बाद निर्धारित अवधि पूरी होने पर उन्हें एप के माध्यम से लॉग-आउट करना होता है। गुरुवार को सर्वर में आई समस्या के चलते यह सामान्य प्रक्रिया बाधित हो गई।

शिक्षकों के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे लॉग-इन करने के बाद शाम चार बजे तक कई शिक्षक लॉग-आउट नहीं कर पाए। लगातार प्रयास करने के बावजूद एप पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही थी। इससे शिक्षकों में यह चिंता बढ़ने लगी कि यदि सिस्टम में उनकी लॉग-आउट एंट्री दर्ज नहीं हुई तो कहीं उनकी अनुपस्थिति न मानी जाए या वेतन संबंधी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।

नेटवर्क की तलाश में स्कूल की छत तक पहुंचे शिक्षक

छतरपुर सहित कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क पहले से ही एक बड़ी समस्या है। गुरुवार को सर्वर की तकनीकी समस्या ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया। कई शिक्षक मोबाइल हाथ में लेकर स्कूल परिसर के अलग-अलग हिस्सों में नेटवर्क तलाशते रहे।

कुछ जगहों पर शिक्षकों ने स्कूल की छत पर जाकर मोबाइल नेटवर्क पकड़ने की कोशिश की। कई शिक्षक आसपास के ऊंचे स्थानों पर भी पहुंचे। उनका कहना था कि यदि किसी स्थान पर इंटरनेट कनेक्शन मिल जाए तो वे तत्काल एप खोलकर लॉग-आउट की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

इस दौरान शिक्षकों को लगातार यह डर बना रहा कि तकनीकी समस्या के बावजूद यदि लॉग-आउट दर्ज नहीं हुआ तो इसका असर उनकी उपस्थिति और वेतन पर पड़ सकता है।

शाम तक जारी रहे प्रयास

शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने कई बार एप को बंद कर दोबारा खोला, मोबाइल इंटरनेट को चालू-बंद किया और अलग-अलग स्थानों से लॉग-आउट करने की कोशिश की। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

शाम करीब साढ़े चार बजे तक कई शिक्षक लॉग-आउट के लिए प्रयास करते रहे। स्कूल का निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी वे इस चिंता में रुके रहे कि सिस्टम में उनकी उपस्थिति प्रक्रिया अधूरी न रह जाए।

शिक्षकों का कहना था कि यदि तकनीकी खराबी विभागीय सर्वर में है तो उसका खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए। सिस्टम फेल होने की स्थिति में विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

डीपीआई के आदेश से मिली राहत

लगातार सामने आ रही समस्या के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शाम करीब पांच बजे इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के बाद शिक्षकों को राहत मिली और तकनीकी समस्या के कारण लॉग-आउट नहीं कर पाने की स्थिति को लेकर बनी चिंता कम हुई।

शिक्षकों का कहना है कि यदि विभाग की ओर से यह स्पष्टता पहले मिल जाती तो उन्हें कई घंटे नेटवर्क तलाशने में नहीं लगाने पड़ते। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की स्थिति को देखते हुए ई-अटेंडेंस के लिए तकनीकी बैकअप और वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से नेटवर्क की समस्या

शिक्षकों के मुताबिक प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या कोई नई बात नहीं है। कई स्कूल ऐसे इलाकों में हैं जहां मोबाइल इंटरनेट कभी धीमा रहता है तो कभी पूरी तरह गायब हो जाता है।

ऐसे में ई-अटेंडेंस की प्रक्रिया पूरी करने के लिए शिक्षकों को कई बार स्कूल परिसर में नेटवर्क की तलाश करनी पड़ती है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि एक ओर विभाग समय पर उपस्थिति और लॉग-आउट को अनिवार्य कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सभी स्कूलों में मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित नहीं की गई है।

उनका तर्क है कि तकनीकी व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब उसके लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हों।

आपात स्थिति में भी बढ़ती परेशानी

शिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी कर्मचारी के परिवार में अचानक आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए या उसकी तबीयत खराब हो जाए तो ई-अटेंडेंस की छह घंटे की प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में मानवीय आधार पर व्यवस्था होनी चाहिए। यदि किसी तकनीकी कारण से लॉग-आउट नहीं हो रहा हो तो कर्मचारी को दोषी मानने के बजाय सिस्टम की तकनीकी स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

शिक्षकों के मुताबिक सर्वर फेलियर और नेटवर्क की समस्या कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर होती है। इसलिए ऐसी स्थिति में उपस्थिति को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नियम आवश्यक हैं।

संगठन ने सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की

शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में ई-अटेंडेंस अनिवार्य करने से पहले सरकार को शिक्षकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ते जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि शिक्षक दूरस्थ क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो उन्हें वहां काम करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।

कौशल के मुताबिक ई-अटेंडेंस की व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना है, लेकिन तकनीकी खामी के कारण यदि शिक्षक ही परेशान होते हैं तो व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।

तकनीक पर निर्भरता के साथ बैकअप भी जरूरी

ई-अटेंडेंस जैसी व्यवस्था से कर्मचारियों की उपस्थिति को डिजिटल और पारदर्शी तरीके से दर्ज करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचा जरूरी है। सर्वर डाउन होने, इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने या एप में तकनीकी समस्या आने पर वैकल्पिक व्यवस्था का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

गुरुवार की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि यदि एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षक डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं तो सर्वर की क्षमता और तकनीकी बैकअप कितना मजबूत है।

शिक्षकों का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सर्वर क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण स्कूलों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

तकनीकी खामी की जिम्मेदारी शिक्षकों पर न हो

शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि तकनीकी खराबी का असर उनकी सेवा संबंधी रिकॉर्ड पर न पड़े। उनका कहना है कि जब कर्मचारी समय पर स्कूल पहुंचकर लॉग-इन कर चुका है और बाद में सर्वर या नेटवर्क की वजह से लॉग-आउट नहीं हो पा रहा है, तो इसके लिए शिक्षक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

गुरुवार की घटना में डीपीआई के आदेश से तत्काल राहत जरूर मिली, लेकिन इसने ई-अटेंडेंस व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को सामने ला दिया है।

शिक्षकों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल नियम लागू करना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ सर्वर, इंटरनेट, तकनीकी सहायता और वैकल्पिक उपस्थिति व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी। तभी ई-अटेंडेंस शिक्षकों के लिए सुविधा बनेगी, परेशानी नहीं।