आदिवासियों के घर उजाड़ने पर भड़के शिवराज: बोले- मेरे क्षेत्र में अन्याय की हद पार, महिलाओं के आंसू देख पसीजा दिल; दोषियों पर होगी कार्रवाई
सीहोर के कोसमी गांव में वन विकास निगम ने 12 आदिवासी परिवारों के घर तोड़े और उनकी फसलें नष्ट कर दीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई को 'जुर्म की पराकाष्ठा' बताया और प्रभावितों को नए घर व मदद का आश्वासन दिया।
बुदनी के कोसमी में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने और खेतों में खड़ी फसल नष्ट होने के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को फोन कर कार्रवाई पर सवाल उठाए और पीड़ित परिवारों को नए घर बनवाने का भरोसा दिया।
सीहोर/बुधनी। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने और खेतों में खड़ी मक्का की फसल नष्ट किए जाने के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। वन विकास निगम की कार्रवाई से प्रभावित बरेला समुदाय के परिवारों के सामने रोजी-रोटी और सिर छिपाने की जगह का संकट खड़ा होने की आशंका है। मामले ने उस समय राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतिहा हो गई है। आदिवासी महिलाओं और बच्चों की पीड़ा का जिक्र करते हुए उन्होंने दोषियों को नहीं बख्शने की बात कही।
कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के विदिशा लोकसभा संसदीय क्षेत्र और बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में यहां रहने वाले आदिवासी परिवारों के मकान हटाने और फसल नष्ट किए जाने के आरोपों ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। शिवराज ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और पूरे मामले को मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने उठाने की बात कही।
आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने और फसल उजाड़ने के आरोप
ग्राम कोसमी में वन विकास निगम की कार्रवाई को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, लंबे समय से गांव में रह रहे बरेला समुदाय के कई आदिवासी परिवारों के मकान हटाए जा रहे हैं। इसके साथ ही खेतों में खड़ी मक्का की फसल नष्ट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन घटनाओं से प्रभावित परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आदिवासी परिवारों के लिए खेती केवल आय का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवारों के भरण-पोषण का प्रमुख आधार है। ऐसे में खड़ी फसल नष्ट होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, मकानों को तोड़ने की कार्रवाई से परिवारों के सामने रहने और बच्चों की देखभाल करने जैसी बुनियादी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
इस पूरे मामले में प्रभावित परिवारों की स्थिति और कार्रवाई के आधार को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वन विकास निगम और जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की परिस्थितियों और संबंधित दावों की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पीड़ित महिलाओं से मिले शिवराज, अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़ीं
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जब प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे, तो वहां का माहौल भावुक हो गया। बताया गया कि कई महिलाएं उनसे मिलते ही रोने लगीं और अपनी परेशानियां बताईं। धरना स्थल पर बैठकर शिवराज ने पीड़ित परिवारों की बात सुनी और उनके साथ हुई कथित कार्रवाई को लेकर चिंता जताई।
महिलाओं और बच्चों की परेशानी का जिक्र करते हुए शिवराज ने कहा कि परिवारों की पीड़ा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, जिन लोगों के खेत प्रभावित हुए हैं और जिनके मकान हटाए जा रहे हैं, उनके सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता है।
शिवराज ने कहा कि वह इन परिवारों की स्थिति और उनकी तकलीफ मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। उन्होंने महिलाओं के आंसुओं, उजड़े खेतों और भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री को देंगे।
‘मेरे क्षेत्र में जुल्म-अन्याय की इंतिहा हो गई’
मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय की हद हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की सिसकियां, आंखों के आंसू, कुचले हुए खेत और चौपट होते भविष्य की बात वह मुख्यमंत्री मोहन यादव को बताएंगे।
शिवराज के बयान से साफ है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से सरकार और पार्टी की छवि भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा, “यह तो मुख्यमंत्री जी को भी बदनाम करने की साजिश लगती है मुझे।” शिवराज ने आशंका जताई कि कुछ अधिकारियों की कार्रवाई से सरकार और भारतीय जनता पार्टी को नुकसान पहुंच सकता है।
उनका कहना था कि आदिवासी परिवार लंबे समय से पार्टी का समर्थन करते आए हैं और उन्होंने लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को वोट दिया है। ऐसे में इन परिवारों के साथ अन्याय होने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
‘इनके वोट से हम जीते, इन्हीं के वोट से मोहन जी मुख्यमंत्री बने’
शिवराज सिंह चौहान ने राजनीतिक संदर्भ में कहा कि जिन आदिवासी परिवारों की परेशानी सामने आई है, उन्होंने चुनावों में भाजपा का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को वोट दिए हैं।
उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के वोट से जनप्रतिनिधि जीतकर आते हैं और मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं। इसलिए इन परिवारों की समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
शिवराज ने इस घटनाक्रम को अपने लिए दुखद बताते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी पर भरोसा जताया, उन्हें ही यदि इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उनके बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि वह खुद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। अपने संसदीय क्षेत्र में आदिवासी परिवारों की परेशानी को लेकर उनका सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताना प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे को भी सामने लाता है।
घर नहीं तोड़ने के निर्देश देने का दावा, फिर भी कार्रवाई जारी रहने के आरोप
शिवराज सिंह चौहान ने बातचीत में बताया कि उन्होंने अधिकारियों से निवेदन किया था कि जमीन पर लंबे समय से रह रहे इन परिवारों को परेशान नहीं किया जाए। जानकारी के अनुसार, उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासी परिवारों के मकान नहीं गिराने के निर्देश भी दिए थे।
इसके बावजूद वन विकास निगम की ओर से कार्रवाई जारी रहने के आरोप सामने आए हैं। इसी बिंदु को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि अधिकारियों को कार्रवाई रोकने या परिवारों को राहत देने के लिए कहा गया था, तो उसके बाद क्या कदम उठाए गए।
हालांकि, निर्देशों की प्रकृति, संबंधित अधिकारियों तक उनकी जानकारी पहुंचने और कार्रवाई के कानूनी आधार को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। वन विकास निगम और जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत पक्ष सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और निर्देशों के बावजूद कार्रवाई जारी रहने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
मुख्यमंत्री के सामने उठेगा मामला, कार्रवाई और राहत पर टिकी नजरें
शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों की पीड़ा मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंचाने की बात कही है। अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को संभावित राहत पर नजर रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन परिवारों के मकान प्रभावित हुए हैं, उनके रहने की व्यवस्था कैसे होगी। इसके साथ ही मक्का की फसल को नुकसान पहुंचने के आरोपों पर भी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। यदि परिवारों को आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसके आकलन और संभावित सहायता को लेकर भी प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
मामले में वन विकास निगम और जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए कार्रवाई के कानूनी आधार, प्रभावित परिवारों की जमीन और आवास से जुड़े दावों तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
फिलहाल, कोसमी गांव का यह मामला आदिवासी परिवारों के अधिकारों, प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी जवाबदेही से जुड़े सवालों को सामने ला रहा है। शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री स्तर पर इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है, प्रभावित परिवारों को राहत मिलती है या नहीं और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के संबंध में कोई कदम उठाया जाता है या नहीं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस