राजगढ़ में दर्दनाक हादसा: नाले में बही ईको वैन, 3 बच्चों समेत 9 की मौत; रोकने के बावजूद पानी में उतारी कार
राजगढ़ जिले में सोमवार सुबह तेज बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। पचोर-सारंगपुर मार्ग पर पड़ाना कस्बे के पास झिरी नाले में पानी के तेज बहाव के कारण एक ईको वैन बह गई।
राजगढ़ में भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया. झिरी नाले के तेज बहाव में यात्रियों से भरी ईको कार बह गई. कार में देवास जिले के 11 लोग सवार थे. इनमें से 9 की मौत हो गई, जबकि 2 बचा लिए गए.
राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में तीन बच्चों और दो महिलाओं समेत नौ लोगों की मौत हो गई। पचोर-सारंगपुर रोड पर पड़ाना कस्बे के पास झिरी नाले में तेज बारिश के कारण पानी पुल के ऊपर से बह रहा था। इसी दौरान एक ईको वैन पानी के तेज बहाव में बहकर नाले में जा गिरी। हादसे में वाहन सवार नौ लोगों की जान चली गई, जबकि दो युवक तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे।
हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। SDERF की मदद से बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। क्रेन की सहायता से पानी में डूबी ईको वैन को बाहर निकाला गया। हालांकि, वाहन के अंदर कोई व्यक्ति नहीं मिला। मृतकों के शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया।
इलाज के लिए जा रहे थे, रास्ते में हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार ईको वैन में सवार सभी लोग देवास जिले के सतवास क्षेत्र के धांसड़ गांव के रहने वाले थे। वे कड़लावद गांव की ओर जा रहे थे। बताया गया कि परिवार की एक महिला को लकवा लगा था और उसे इलाज के लिए कनावड़ धाम ले जाया जा रहा था।
वाहन मुकेश सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड है और हादसे के समय वही कार चला रहा था। उसके साथ हुकुम सिंह भी मौजूद था। दोनों युवक हादसे के दौरान किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए। उन्हें सारंगपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मुकेश ने बताया कि नाले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गांव के लोगों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया था। परिवार करीब 15 मिनट तक वहीं रुका भी रहा। लेकिन इलाज के लिए समय पर पहुंचने की चिंता के कारण आगे जाने का फैसला किया गया।
मुकेश के मुताबिक, परिवार के कुछ सदस्यों ने कहा कि यदि वे समय पर नहीं पहुंचे तो इलाज की पर्ची नहीं मिल पाएगी और अगले दिन फिर आना पड़ेगा। इसके बाद उन्होंने वाहन को पानी में उतार दिया।
30 फीट का पुल निर्माणाधीन, पानी के बीच नहीं दिखा रास्ता
हादसा पड़ाना के पास झिरी नाले पर हुआ। यहां करीब 30 फीट लंबा पुल निर्माणाधीन है। लगातार बारिश के कारण नाले का पानी पुल के ऊपर से बह रहा था। बताया जा रहा है कि पानी के तेज बहाव और पुल की अधूरी स्थिति के कारण सड़क का वास्तविक रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था।
जैसे ही ईको वैन पानी के बीच पहुंची, वह अपना संतुलन खो बैठी और तेज बहाव में बह गई। वाहन में मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
प्रत्यक्षदर्शी महेंद्र परमार ने बताया कि सड़क पर पानी भरा हुआ था। उन्होंने वाहन चालक को रोकने की कोशिश की थी। चालक को बताया गया था कि आगे पानी घुटने तक भरा है और वाहन को वहां से नहीं निकालना चाहिए। इसके बावजूद कार आगे बढ़ा दी गई।
प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, सड़क के किनारे रेलिंग भी नहीं थी। इसके कारण वाहन पानी के तेज बहाव में नाले की ओर चला गया।
PWD ने कहा- डायवर्जन के बोर्ड लगाए गए थे
हादसे के बाद निर्माणाधीन पुल और सड़क पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर पीके शर्मा ने बताया कि सड़क पर निर्माण कार्य चल रहा है और वहां डायवर्जन के बोर्ड लगाए गए हैं। उनके अनुसार मौके पर अभी भी ये बोर्ड देखे जा सकते हैं।
PWD अधिकारी ने कहा कि हादसे के समय रास्ता पानी में डूबा हुआ था। ग्रामीणों ने वाहन चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश भी की थी। इसके बावजूद वाहन को पानी में उतार दिया गया, जिसके बाद यह हादसा हो गया।
अब प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि निर्माणाधीन पुल के पास वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और पानी बढ़ने के बाद रास्ते को पूरी तरह बंद क्यों नहीं किया गया।
रेस्क्यू में जुटी प्रशासन की टीमें
हादसे की सूचना मिलते ही एसडीएम रोहित बम्होरे और एसडीओपी अरविंद सिंह सहित पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। SDERF की टीम को रेस्क्यू के लिए बुलाया गया।
तेज बहाव और पानी की स्थिति के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आईं। इसके बावजूद टीम ने क्रेन की मदद से ईको वैन को नाले से बाहर निकाला। पुलिस और बचाव दल ने वाहन तथा आसपास के क्षेत्र में तलाश अभियान चलाया।
टीआई राहुल रघुवंशी ने बताया कि वाहन को बाहर निकालने के दौरान उसके अंदर कोई व्यक्ति नहीं मिला। इसके बाद आसपास के पानी और नाले में भी तलाश की गई।
मृतकों में तीन मासूम बच्चे
इस हादसे में एक ही परिवार और उनके परिचितों से जुड़े कई लोगों की जान चली गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल हैं। हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
बताई गई मृतकों की सूची में:
शंकर सिंह (50)
सागरबाई, पत्नी शंकर सिंह
रीनू (28), पत्नी हुकुम सिंह
राजवीर (3), पिता हुकुम सिंह
जसप्रीत, पिता हुकुम सिंह
विशाल चौहान
पूजा (27), पत्नी विशाल चौहान
रिशिका
आनंद सिंह
शामिल हैं।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी मातम पसरा हुआ है। एक साथ इतने लोगों की मौत से परिवार और ग्रामीण सदमे में हैं।
दो युवकों ने तैरकर बचाई जान
हादसे में मुकेश और हुकुम सिंह किसी तरह वाहन से बाहर निकलने में कामयाब रहे। दोनों ने तैरकर अपनी जान बचाई। हादसे के बाद उन्हें सारंगपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।
मुकेश ने बताया कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि पानी का बहाव इतना खतरनाक हो सकता है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने पहले ही रोकने की कोशिश की थी, लेकिन इलाज के लिए समय पर पहुंचने की मजबूरी के कारण वाहन आगे बढ़ गया।
मुख्यमंत्री ने की आर्थिक सहायता की घोषणा
हादसे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माणाधीन पुल और बारिश के दौरान डूबे रास्ते पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। यदि पानी सड़क के ऊपर से बह रहा था और वाहन चालकों को आगे बढ़ने से रोकने की जरूरत थी, तो रास्ते को पूरी तरह बंद करने और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था क्यों नहीं की गई—इसकी जांच जरूरी है।
राजगढ़ का यह हादसा बारिश के मौसम में निर्माणाधीन पुलों और जलभराव वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाता है। प्रशासन के सामने अब राहत और मृतकों के परिवारों को सहायता देने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि ऐसी घटना दोबारा न हो।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस