“वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम की अनुमति जारी होने के चार घंटे में निरस्त, मुकेश सहनी ने कलेक्ट्रेट में दिया धरना”
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी के उरई में प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति जारी होने के महज चार घंटे बाद निरस्त कर दी गई। कार्यक्रम रद्द होने से नाराज सहनी कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद धरने पर बैठ गए। उन्होंने अनुमति रद्द करने के कारणों पर सवाल उठाते हुए प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और जातिवाद के आरोप लगाए। सहनी ने जांच रिपोर्ट आने तक धरना जारी रखने का ऐलान किया और निषाद-केवट समाज को आरक्षण मिलने तक भाजपा को वोट न देने की अपील की।
अनुमति जारी होने के चार घंटे बाद रद्द, मुकेश सहनी का कलेक्ट्रेट में धरना; अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
उरई। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी की संकल्प यात्रा का 45वां पड़ाव जालौन जिले के उरई स्थित जायसवाल होटल में प्रस्तावित था। कार्यक्रम के लिए नगर मजिस्ट्रेट ने 23 अगस्त को विधिवत अनुमति जारी की थी। अनुमति पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री अच्छे लाल निषाद के नाम से शाम 5:04 बजे जारी हुई थी। कार्यक्रम में करीब 500 लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी।
हालांकि, अनुमति जारी होने के करीब चार घंटे बाद ही नगर मजिस्ट्रेट ने रात 9:05 बजे कार्यक्रम की अनुमति निरस्त कर दी। तब तक कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी को भी कार्यक्रम के संबंध में अवगत करा दिया गया था। सोमवार सुबह बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए। कार्यक्रम निरस्त होने की जानकारी मिलने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई।
मुकेश सहनी सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि अनुमति निरस्त करने के लिए जो कारण बताया गया है, वह उचित नहीं है। प्रशासन पहले से कैसे यह तय कर सकता है कि कार्यक्रम में भगदड़, विवाद या किसी अप्रिय घटना की आशंका है।
जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद भी सहनी ने कहा कि जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, वह कलेक्ट्रेट परिसर से नहीं जाएंगे। वह जिलाधिकारी के चैंबर के सामने लगी गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए।
पत्रकारों से बातचीत में मुकेश सहनी ने प्रशासन पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के भीतर जातिवाद का जहर भरा हुआ है और वे राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि अनुमति जारी करने के बाद उसे निरस्त किया गया है तो कार्यक्रम में हुआ खर्च संबंधित अधिकारी से वसूल किया जाना चाहिए। सहनी ने सवाल उठाया कि जब अनुमति दी गई थी तो कुछ घंटे बाद उसे रद्द करने की जरूरत क्यों पड़ी।
सहनी ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी घबराई हुई है और बाबा साहेब के संविधान को नहीं मानती। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है। वीरांगना फूलन देवी की धरती पर केवट और निषाद समाज को उनका अधिकार और आरक्षण दिलाने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि जब तक केवट और निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिलता, तब तक भाजपा को वोट न दें। सहनी के अनुसार, कार्यक्रम निरस्त होने के विरोध में कार्यकर्ताओं ने हाथ में गंगाजल लेकर भाजपा को वोट नहीं देने की शपथ भी ली।
मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे अधिकारियों पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ता जा रहा है और वे सरकारी काम छोड़कर राजनीतिक दलों के एजेंडे के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारी अपनी सेवा में रहते हैं, इसलिए उन्हें संविधान के अनुसार निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी जनता के वोट से ही सत्ता में आते हैं, ऐसे में उसी जनता के अधिकारों को दबाना और संविधान को ताक पर रखना उचित नहीं है। सहनी ने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर निषाद और केवट समाज के आरक्षण का मुद्दा उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जालौन में उनकी संकल्प यात्रा में प्रशासन की ओर से व्यवधान पैदा किया गया है और इस मामले की जांच होने तक उनका धरना जारी रहेगा। प्रशासन की जांच के बाद ही अनुमति निरस्त किए जाने के कारणों और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस