दिग्विजय पर कार्रवाई क्यों नहीं? सिर्फ मुझे नोटिस क्यों? कांग्रेस में निधि चतुर्वेदी ने उठाए बड़े सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। दिग्विजय सिंह पर पुत्र मोह में संगठन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाने वाली प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने खुद को मिले कारण बताओ नोटिस पर सवाल उठाए हैं। निधि ने पूछा है कि दिग्विजय सिंह के बयान पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और सिर्फ उन्हें ही नोटिस क्यों दिया गया। साथ ही संगठन प्रभारी से सात दिन में जवाब मांगते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह तेज! निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह के बयानों और पार्टी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे चयनात्मक और भेदभावपूर्ण बताया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने उन्हें जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' का सार्वजनिक रूप से जवाब देते हुए प्रदेश नेतृत्व पर चयनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी अनुशासन सभी नेताओं पर समान रूप से लागू होता है, तो दिग्विजय सिंह के बयान पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि उनके बयान पर तत्काल नोटिस जारी कर दिया गया।
यह विवाद उज्जैन जमीन मामले में कांग्रेस की रणनीति, दिग्विजय सिंह के बयान और उसके बाद निधि चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया से शुरू हुआ था। अब यह मामला पार्टी के भीतर दोहरे मापदंड, अधिकार क्षेत्र और संगठनात्मक प्रक्रिया पर बहस का विषय बन गया है।
दिग्विजय सिंह के बयान पर उठाए सवाल
निधि चतुर्वेदी ने अपने जवाब में कहा कि कांग्रेस उज्जैन जमीन विवाद को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक अभियान चला रही थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी इस मुद्दे पर सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहे थे। इसी दौरान दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से ऐसा बयान दिया, जिसमें संबंधित ट्रस्ट को सरकारी बताया गया। निधि का आरोप है कि इस बयान से कांग्रेस के अभियान को नुकसान पहुंचा और प्रदेश नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति कमजोर हुई।
उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता के बयान से पार्टी की आधिकारिक लाइन प्रभावित होती है, तो उस पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे यह संदेश जाता है कि पार्टी में अलग-अलग नेताओं के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं।
'सिर्फ मुझे ही नोटिस क्यों?'
निधि चतुर्वेदी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उन्होंने दिग्विजय सिंह के बयान का विरोध किया और संगठन के हित में सवाल उठाए, तो केवल उन्हें ही कारण बताओ नोटिस क्यों भेजा गया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ यह मांग की थी कि यदि किसी वरिष्ठ नेता के बयान से संगठन को नुकसान पहुंचा है, तो उनसे भी जवाब मांगा जाना चाहिए। लेकिन इसके बजाय कार्रवाई उस व्यक्ति पर हुई जिसने सवाल उठाए।
निधि का कहना है कि इससे यह प्रतीत होता है कि पार्टी में अनुशासन का पालन समान रूप से नहीं कराया जा रहा, बल्कि चयनात्मक तरीके से कार्रवाई की जा रही है।
'पुत्र मोह' वाले बयान पर मचा विवाद
पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब निधि चतुर्वेदी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह "पुत्र मोह" में संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की थी।
इसी बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। अब अपने जवाब में निधि ने कहा है कि यदि उनके बयान को अनुशासनहीनता माना गया, तो पहले उस मूल बयान की जांच होनी चाहिए, जिसके विरोध में उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
संजय कामले के अधिकार पर भी उठाया सवाल
निधि चतुर्वेदी ने केवल नोटिस की मंशा पर ही नहीं, बल्कि उसे जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि नोटिस संगठन प्रभारी संजय कामले की ओर से जारी किया गया, जबकि वे स्वयं भी मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव हैं। उनके अनुसार दोनों समान स्तर के पदाधिकारी हैं।
उन्होंने कांग्रेस के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि एक समकक्ष पदाधिकारी दूसरे समकक्ष पदाधिकारी को इस प्रकार का कारण बताओ नोटिस जारी नहीं कर सकता। इसलिए यह नोटिस अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसकी वैधानिकता पर भी प्रश्न खड़े होते हैं।
निधि ने इसे संगठनात्मक प्रक्रिया का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि किसी कार्रवाई की आवश्यकता थी, तो उसे उचित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए था।
मीडिया में नोटिस लीक होने पर नाराजगी
निधि चतुर्वेदी ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि उन्हें आधिकारिक रूप से नोटिस प्राप्त होने से पहले ही उसकी प्रतियां सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में वायरल हो गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि किसी भी अनुशासनात्मक प्रक्रिया को पहले संबंधित व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, लेकिन यहां पहले उसे सार्वजनिक कर दिया गया।
उन्होंने संगठन प्रभारी से पूछा है कि नोटिस मीडिया तक कैसे पहुंचा और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
सात दिन का अल्टीमेटम, मानहानि की चेतावनी
निधि चतुर्वेदी ने अपने जवाब में संगठन प्रभारी को सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वह कानूनी विकल्प अपनाने पर विचार करेंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह साबित नहीं किया गया कि नोटिस मीडिया तक कैसे पहुंचा, तो वह मानहानि का मुकदमा भी दायर कर सकती हैं।
कांग्रेस में बढ़ सकती है अंदरूनी खींचतान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान भी सामने आ रही है। एक ओर प्रदेश नेतृत्व अनुशासन बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के ही वरिष्ठ पदाधिकारी संगठन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
यदि इस मामले का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो इसका असर पार्टी की आंतरिक एकजुटता और राजनीतिक संदेश दोनों पर पड़ सकता है।
विवाद का मूल सवाल
पूरे घटनाक्रम का केंद्र एक ही प्रश्न बन गया है—यदि किसी नेता के बयान से पार्टी की रणनीति प्रभावित हुई, तो क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई सभी पर समान रूप से लागू होगी, या केवल कुछ लोगों तक ही सीमित रहेगी? निधि चतुर्वेदी ने इसी सवाल को संगठन के सामने रखते हुए अपने नोटिस का जवाब दिया है। अब निगाहें कांग्रेस नेतृत्व पर हैं कि वह इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और आगे क्या कदम उठाता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस