दुःखद -स्कूल की छत पर झंडा लगाते वक्त जिंदा जला छात्र:संचालक ने छुट्टी के बाद बुलाया, हाईटेंशन लाइन से झुलसा; लाश देखकर बिलखते रहे मां-बाप
दतिया में तिरंगा लगाने की तैयारी के दौरान स्कूल की छत पर झंडा लगाने गए 16 वर्षीय छात्र की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मध्य प्रदेश के दतिया में स्कूल की छत पर तिरंगा लगाने के दौरान एक छात्र 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। छात्र छत पर जिंदा जल गया। शरीर से चमड़ी उधड़ गई। हाथ और उंगलियां पूरी तरह जल गई हैं। उंगलियां अकड़ गईं। मामला लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल का है।
दतिया। स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। एक निजी स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज लगाने के दौरान 16 वर्षीय छात्र की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जबकि छात्र की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना ने स्कूलों में सुरक्षा इंतजामों और बच्चों से कराए जाने वाले ऐसे कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, हादसा दतिया स्थित लिटिल स्टार पब्लिक स्कूल में हुआ। स्वतंत्रता दिवस को लेकर स्कूल में तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान 16 वर्षीय छात्र को राष्ट्रीय ध्वज लगाने के लिए स्कूल की छत पर भेजे जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि झंडे के लिए लोहे के पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा था।
छात्र जैसे ही छत पर झंडा लगाने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान लोहे का पाइप स्कूल के ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन विद्युत लाइन के संपर्क में आ गया। पाइप के बिजली लाइन से छूते ही छात्र करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया। अचानक हुए इस हादसे से स्कूल परिसर में मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया।
हादसे के बाद छात्र को बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। घटना की जानकारी तत्काल परिजनों को दी गई। बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। छात्र का शव देखकर मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में घटना को लेकर शोक का माहौल बन गया।
स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
मृतक छात्र के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि स्कूल की छत के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी, इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका आरोप है कि ऐसी स्थिति में छात्र को छत पर झंडा लगाने के लिए भेजना गंभीर लापरवाही है।
परिजनों ने सवाल उठाया कि जब स्कूल की छत के आसपास हाईटेंशन विद्युत लाइन मौजूद थी, तो झंडा लगाने के लिए लोहे के पाइप का इस्तेमाल क्यों किया गया और छात्र को वहां जाने की अनुमति किस आधार पर दी गई। परिवार ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
छुट्टी के बाद बुलाए जाने की बात भी सामने आई
परिजनों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि छात्र को स्कूल की छुट्टी के बाद झंडा लगाने के लिए बुलाया गया था। हालांकि, इस संबंध में सामने आए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि छात्र को स्कूल परिसर में किस परिस्थिति में बुलाया गया था तथा झंडा लगाने की जिम्मेदारी उसे कैसे दी गई।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे की परिस्थितियों, स्कूल परिसर में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था, हाईटेंशन लाइन की स्थिति और झंडा लगाने की प्रक्रिया से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना के समय स्कूल में कौन-कौन लोग मौजूद थे और छात्र को छत पर भेजने का निर्णय किसने लिया था। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन की भूमिका और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
पुलिस की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई थी।
स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच बड़ा सवाल
स्वतंत्रता दिवस देशभर में उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जाता है। स्कूलों में भी बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ध्वजारोहण और अन्य गतिविधियों की तैयारी करते हैं। लेकिन दतिया की यह घटना इन तैयारियों के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत को सामने लाती है।
हाईटेंशन बिजली लाइनों के आसपास किसी भी तरह की गतिविधि बेहद जोखिमपूर्ण हो सकती है। खासकर लोहे के पाइप, धातु की सीढ़ी या अन्य विद्युत चालक वस्तुओं के इस्तेमाल के दौरान अतिरिक्त सावधानी आवश्यक होती है। ऐसे स्थानों पर बच्चों को भेजना जानलेवा साबित हो सकता है।
इस दर्दनाक हादसे ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के दौरान सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन करता है और क्या कार्यक्रम से पहले परिसर का सुरक्षा निरीक्षण किया जाता है।
फिलहाल छात्र की मौत से परिवार सदमे में है। जिस दिन परिवार और स्कूल में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर उत्साह होना चाहिए था, उसी समय एक परिवार ने अपना 16 वर्षीय बेटा खो दिया। घटना की पूरी सच्चाई पुलिस जांच के बाद सामने आएगी, लेकिन इस हादसे ने स्कूल प्रबंधन और प्रशासन के सामने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस