बीआईएस कंपनी की भर्ती में अनियमितता के गंभीर आरोप, कलेक्टर से जांच और टेंडर निरस्त करने की मांग

छतरपुर के उप स्वास्थ्य केंद्रों में BIS कंपनी की आउटसोर्स भर्ती पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता विनय विल्थरे ने कलेक्टर मृणाल मीणा से जांच की मांग की है। आरोपों में उम्र सीमा की अनदेखी, नियुक्ति में कथित अवैध वसूली, ड्राइवर भर्ती, आरक्षण नियमों के उल्लंघन और कर्मचारियों के ड्यूटी से गायब रहने की बात शामिल है। सबसे बड़ा आरोप है कि कंपनी को काम संभाले चार महीने हो चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों को सिर्फ एक महीने का वेतन मिला है। शिकायतकर्ता ने जांच के बाद टेंडर निरस्त कर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।

बीआईएस कंपनी की भर्ती में  अनियमितता के गंभीर आरोप, कलेक्टर से जांच और टेंडर निरस्त करने की मांग

भर्ती में उम्र सीमा के नियमों की अनदेखी का आरोप

नियुक्ति के नाम पर अवैध वसूली का दावा

वाहन नहीं, फिर भी ड्राइवर भर्ती करने का आरोप

सफाईकर्मी भर्ती में 95% अनारक्षित नियुक्तियों का आरोप

कर्मचारियों के ड्यूटी से गायब रहने की शिकायत

कंपनी को काम संभाले 4 महीने, कर्मचारियों को सिर्फ 1 महीने का 

छतरपुर। जिले के उप स्वास्थ्य केद्रों में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से की गई भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है। छतरपुर निवासी विनय पिता नरेंद्र विल्थरे ने बक्सवाहा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर मृणाल मीणा को शिकायत पत्र सौंपकर बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सर्विस (BIS) कंपनी के माध्यम से हुई नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, कथित अवैध वसूली, आरक्षण नियमों के उल्लंघन और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिले के उप स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों तथा कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद भर्ती का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित टेंडर की शर्तों को चुनौती देने वाली याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन थी। इसके बावजूद कंपनी के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस दौरान नियमों को दरकिनार करते हुए ऐसे लोगों को भी नियुक्त किया गया, जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते थे।

विनय विल्थरे के अनुसार, भर्ती के लिए कर्मचारियों की आयु सीमा 21 से 45 वर्ष निर्धारित की गई थी, लेकिन आरोप है कि इस सीमा से कम और अधिक उम्र के लोगों को भी नियुक्ति दे दी गई। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच कर पात्रता और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की है।

नियुक्ति के नाम पर अवैध वसूली का भी आरोप

शिकायत में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कथित आर्थिक लेनदेन का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों से नियुक्ति के नाम पर कथित रूप से अवैध राशि की वसूली की गई। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में क्या साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं, यह शिकायत की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल कंपनी के अधिकारियों, संबंधित विभागीय अधिकारियों और चयनित कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच की जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

वाहन उपलब्ध नहीं, फिर भी ड्राइवरों की भर्ती का आरोप

मामले में ड्राइवरों की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिले के कई अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद ड्राइवरों की भर्ती कर ली गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में भी कथित रूप से आर्थिक लेनदेन हुआ, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा।

शिकायत में प्रशासन से यह जांचने की मांग की गई है कि जिन स्थानों के लिए ड्राइवर नियुक्त किए गए, वहां वास्तव में कितने वाहन उपलब्ध हैं और उनके संचालन के लिए कितने ड्राइवरों की आवश्यकता थी। इसके साथ ही नियुक्त कर्मचारियों की उपस्थिति और वास्तविक ड्यूटी की भी जांच कराने की मांग की गई है।

सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में आरक्षण को लेकर सवाल

शिकायत में मल्टी ग्रुप-डी के सफाईकर्मी पदों पर हुई नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि करीब 95 प्रतिशत नियुक्तियां अनारक्षित वर्ग से कर दी गईं। इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है।

यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी नियमों के पालन की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। शिकायतकर्ता ने नियुक्त कर्मचारियों की पूरी सूची, उनकी श्रेणी, पात्रता और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से जांचने की मांग की है।

उप स्वास्थ्य केंद्रों में सफाई व्यवस्था पर भी सवाल

शिकायत में कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नियुक्त किए गए कुछ कर्मचारी नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं पहुंच रहे हैं। इसके कारण कई उप स्वास्थ्य केंद्रों के परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और गंदगी की स्थिति बनी हुई है।

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि सभी नियुक्त कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड जांचा जाए। बायोमेट्रिक या उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर यह पता लगाया जाए कि नियुक्त कर्मचारी वास्तव में अपने निर्धारित स्थान पर सेवाएं दे रहे हैं या नहीं।

चार महीने से कंपनी के काम संभालने का दावा, वेतन सिर्फ एक महीने का

मामले का सबसे गंभीर आरोप कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार, टेंडर की शर्तों में यह प्रावधान था कि बजट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आउटसोर्स कंपनी को शुरुआती तीन महीने तक कर्मचारियों का वेतन स्वयं वहन करना था।

शिकायत में दावा किया गया है कि कंपनी को काम संभाले करीब चार महीने हो चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों को अब तक केवल एक महीने का वेतन ही मिला है। यदि यह स्थिति सही है तो इसका सीधा असर सैकड़ों कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से कंपनी के भुगतान रिकॉर्ड, कर्मचारियों की उपस्थिति, बिलों और विभाग की ओर से जारी भुगतान की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कर्मचारियों को लंबित वेतन का भुगतान कराने की मांग भी रखी गई है।

टेंडर निरस्त कर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

विनय विल्थरे ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में टेंडर की शर्तों का उल्लंघन, गलत नियुक्तियां, आरक्षण नियमों की अनदेखी या आर्थिक अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित कंपनी का टेंडर निरस्त किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।

अब शिकायत के बाद जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। प्रशासनिक जांच के दौरान भर्ती से जुड़े दस्तावेज, टेंडर की शर्तें, चयन सूची, कर्मचारियों की आयु एवं श्रेणी, उपस्थिति रिकॉर्ड, वेतन भुगतान और वाहन व्यवस्था की जांच से आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

फिलहाल, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। जिला प्रशासन की जांच और संबंधित विभाग तथा कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में कितनी अनियमितताएं हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।