बसपा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: अशोक सिद्धार्थ फिर निष्कासित, रणधीर सिंह बेनीवाल भी पार्टी से बाहर; मायावती ने अनुशासन पर दिखाई सख्ती
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने समधी अशोक सिद्धार्थ पर एक्शन लेते हुए उन्हें बसपा से बाहर निकाल दिया है. इससे पहले मायावती ने पहले अशोक से दिल्ली, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल का प्रभार वापस लिया.
बसपा में मायावती का बड़ा एक्शन: अशोक सिद्धार्थ फिर निष्कासित, रणधीर सिंह बेनीवाल भी पार्टी से बाहर
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को एक बार फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनके साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी अनुशासनहीनता और पार्टी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। बसपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई संगठन और बहुजन आंदोलन के हित में की गई है तथा पार्टी अनुशासन के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
पार्टी के इस फैसले ने बसपा के भीतर चल रही संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले दो दिनों से पार्टी में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे थे। शनिवार को मायावती ने सबसे पहले अशोक सिद्धार्थ से चार राज्यों के प्रभारी की जिम्मेदारी वापस ले ली थी। इसके बाद रविवार को उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का औपचारिक निर्णय लिया गया।
अशोक सिद्धार्थ पर लगे गंभीर आरोप
बसपा की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अशोक सिद्धार्थ को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान समुचित तालमेल न बैठाने, संगठनात्मक अनुशासन का पालन न करने तथा पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने के आरोप में निष्कासित किया गया है। पार्टी का कहना है कि उनके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं और कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उनके व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं आया।
बसपा नेतृत्व ने बताया कि अशोक सिद्धार्थ को इससे पहले भी लगभग एक वर्ष पूर्व पार्टी से निष्कासित किया गया था। बाद में उन्हें इस शर्त पर दोबारा संगठन में शामिल किया गया था कि भविष्य में वे अनुशासन का पालन करेंगे और किसी भी प्रकार की शिकायत का अवसर नहीं देंगे। हालांकि, पार्टी का दावा है कि इसके बावजूद उनके कार्यशैली में सुधार नहीं आया।
बसपा के अनुसार, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से भी अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ अनुशासनहीनता संबंधी शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। पार्टी ने कहा कि बार-बार समझाने और चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन नहीं किया, जिसके चलते अंततः उन्हें निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।
"वापसी की खबरें भ्रम फैलाने का प्रयास"
बसपा ने अपने बयान में यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में अशोक सिद्धार्थ की संगठन में वापसी को लेकर जो खबरें और चर्चाएं चल रही थीं, वे पूरी तरह भ्रामक थीं। पार्टी का आरोप है कि कुछ शरारती और षड्यंत्रकारी तत्व जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैलाकर कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे थे। नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि अब अशोक सिद्धार्थ को भविष्य में पार्टी में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा।
रणधीर सिंह बेनीवाल भी बाहर
मायावती ने संगठनात्मक कार्रवाई के तहत राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया है। सहारनपुर निवासी बेनीवाल के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी थी। पार्टी के अनुसार, उनके खिलाफ भी अनुशासनहीनता और संगठन के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने की शिकायतें मिली थीं।
बसपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन की मजबूती और पार्टी हित को सर्वोपरि रखते हुए यह फैसला लिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चाहे कोई भी नेता कितना ही बड़ा क्यों न हो, यदि वह संगठनात्मक अनुशासन का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रामजी गौतम को मिली नई जिम्मेदारी
रणधीर सिंह बेनीवाल के निष्कासन के बाद बसपा ने संगठन में नई जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया है। राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को एक बार फिर पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव तक वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
बसपा नेतृत्व का मानना है कि संगठन को मजबूत बनाने और राज्यों में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने के लिए अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।
संगठनात्मक ढांचे में नई नीति लागू
बसपा ने इस अवसर पर संगठन को लेकर एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला भी घोषित किया है। पार्टी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के जिन पदाधिकारियों को अन्य राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, वे अब उत्तर प्रदेश संगठन में किसी अन्य पद पर नहीं रहेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन करना और संगठनात्मक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया है।
पार्टी का मानना है कि इससे पदाधिकारियों का पूरा ध्यान अपने-अपने राज्यों के संगठन विस्तार पर केंद्रित रहेगा और कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी।
कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील
बसपा ने अपने सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की है कि वे शरारती एवं षड्यंत्रकारी तत्वों से सावधान रहें। पार्टी का कहना है कि कुछ लोग संगठन को कमजोर करने और उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की बसपा सरकार बनाने के अभियान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। साथ ही संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते रहें।
मीडिया से भी किया आग्रह
बसपा ने मीडिया संस्थानों से भी अपील की है कि वे पार्टी से संबंधित समाचारों के प्रसारण में केवल प्रमाणित तथ्यों का ही उपयोग करें। पार्टी ने कहा कि मिथ्या, भ्रामक अथवा अपुष्ट खबरों के प्रसार से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, इसलिए जिम्मेदार पत्रकारिता का पालन किया जाना चाहिए।
अनुशासन पर मायावती का स्पष्ट संदेश
ताजा कार्रवाई को राजनीतिक विश्लेषक बसपा में अनुशासन स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं। पिछले कुछ समय से मायावती लगातार संगठन में बदलाव कर रही हैं और विभिन्न राज्यों में पार्टी की नई रणनीति पर काम कर रही हैं। अशोक सिद्धार्थ और रणधीर सिंह बेनीवाल जैसे वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन से यह स्पष्ट संकेत गया है कि पार्टी नेतृत्व अनुशासनहीनता के मामलों में किसी भी प्रकार की ढील देने के पक्ष में नहीं है।
आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए बसपा संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह संगठनात्मक फेरबदल पार्टी की चुनावी तैयारियों का भी अहम हिस्सा माना जा रहा है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस