जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन बिल 2026 संसद से पास: फर्जी सर्टिफिकेट पर सख्ती, देर से रजिस्ट्रेशन के लिए नए नियम लागू
लोकसभा के बाद मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा से भी 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक' को मंजूरी मिल गई. आइए जानते हैं इसके पास होने के बाद क्या बदलाव होंगे.
राज्यसभा ने मंगलवार को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इससे पहले यह विधेयक 31 जुलाई को लोकसभा से भी पारित हो चुका था। अब संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है
नई दिल्ली। देश में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा के बाद मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा ने भी जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में बदलाव कर देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाना है, ताकि फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया। बिल पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना और समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करना है।
समय पर पंजीकरण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं, जनगणना, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
अब तक कई मामलों में वर्षों बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं अनियमितताओं को रोकने के लिए सरकार ने कानून में संशोधन किया है।
एक साल से दो साल के बीच पंजीकरण के लिए मंजूरी जरूरी
नए संशोधन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण अब सामान्य प्रक्रिया से नहीं होगा।
ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज और जानकारी पूरी तरह सत्य एवं प्रमाणिक हों।
दो साल से अधिक देर होने पर न्यायिक आदेश अनिवार्य
विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान दो वर्ष से अधिक समय बाद होने वाले पंजीकरण से जुड़ा है।
यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो अब उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश के बाद ही संभव होगा।
इससे पहले सक्षम न्यायिक अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और तथ्यों की जांच करेंगे। जांच पूरी होने और संतुष्ट होने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी।
फर्जी प्रमाण पत्रों पर लगेगी रोक
सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
कई बार नकली जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग सरकारी नौकरियों, पासपोर्ट, आधार, मतदाता पहचान पत्र, स्कूल प्रवेश, संपत्ति विवाद और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए किया जाता रहा है। वहीं फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के माध्यम से संपत्ति, बीमा और अन्य वित्तीय लाभ लेने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था इन सभी अनियमितताओं को काफी हद तक रोकने में मदद करेगी।
पहले क्या था नियम?
अब तक यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण निर्धारित समय के बाद कराया जाता था, तो प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान थी और कई मामलों में स्थानीय स्तर पर अनुमति मिल जाती थी।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे थे। इसलिए अब अनुमति देने का अधिकार उच्च प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया है, जिससे प्रत्येक मामले की गहन जांच सुनिश्चित हो सके।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने क्या कहा?
राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह संशोधन जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में बदलाव करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को परेशानी देना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाना और समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करना है। सक्षम अधिकारी अनुमति देने से पहले उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की पूरी जांच करेंगे, ताकि किसी प्रकार की फर्जी प्रविष्टि न हो सके।
लोकसभा से पहले ही मिल चुकी थी मंजूरी
इससे पहले 31 जुलाई को लोकसभा ने भी इस विधेयक को पारित कर दिया था। उस दौरान विपक्षी दलों ने गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विरोध जताया और चर्चा की मांग की।
विपक्ष का कहना था कि यह महत्वपूर्ण विधेयक है, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। हालांकि हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद गृह राज्य मंत्री ने जवाब दिया और विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।
नागरिकों पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन आम नागरिकों को समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित करेगा।
यदि कोई परिवार किसी कारणवश समय पर पंजीकरण नहीं करा पाता, तो उसे अब अधिक दस्तावेज और सक्षम अधिकारियों की अनुमति लेनी होगी। इसलिए लोगों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे जन्म या मृत्यु की घटना के तुरंत बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका पंजीकरण कराएं।
प्रशासन को भी मिलेगा फायदा
नए नियम लागू होने के बाद सरकार के पास अधिक सटीक जनसंख्या और मृत्यु संबंधी आंकड़े उपलब्ध होंगे। इससे स्वास्थ्य नीति, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, सरकारी योजनाओं और जनगणना संबंधी कार्यों में भी बेहतर योजना बनाना संभव होगा।
साथ ही आधार, पासपोर्ट, मतदाता सूची और अन्य सरकारी रिकॉर्ड के साथ जन्म-मृत्यु डेटा का बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 का संसद से पारित होना देश की नागरिक पंजीकरण व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि नए नियमों से फर्जी प्रमाण पत्रों पर प्रभावी रोक लगेगी, रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनेंगे और नागरिकों को समय पर पंजीकरण के प्रति जागरूकता मिलेगी। वहीं देर से पंजीकरण कराने वालों के लिए अब पहले की तुलना में अधिक सख्त और सत्यापन आधारित प्रक्रिया अपनानी होगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस