हाईकोर्ट की सख्ती: मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर तीनों नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों को नोटिस, 11 सितंबर को अगली सुनवाई
राज्यसभा चुनाव में नामांकन निरस्त होने के मामले में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट ने भाजपा नेताओं तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल, महेश केवट, चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन निरस्तीकरण मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने भाजपा के तीनों राज्यसभा सांसदों, चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
जबलपुर। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी निरस्त किए जाने का मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए भाजपा के तीनों नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों, चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस कदम को राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद में एक अहम कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान भाजपा के निर्वाचित सांसद तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट के साथ-साथ भारत निर्वाचन आयोग तथा संबंधित निर्वाचन अधिकारी से जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर निर्धारित की है।
नामांकन निरस्त होने के फैसले को दी गई चुनौती
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया गया था। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने नामांकन पत्र में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई थीं।
बताया गया कि तेलंगाना में लंबित एक आपराधिक प्रकरण सहित कुछ अन्य आवश्यक तथ्यों का खुलासा नामांकन पत्र में नहीं किया गया था। इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया, जिसके बाद भाजपा के उम्मीदवारों का निर्वाचन निर्विरोध होने का रास्ता साफ हो गया।
मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए कानूनी लड़ाई शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा मामला
नामांकन निरस्त होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने पहले सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में निर्वाचन अधिकारी के फैसले को चुनौती दी गई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव संबंधी विवादों के लिए उपलब्ध वैधानिक उपायों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की सलाह दी। इसके बाद मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में चुनाव याचिका दाखिल की।
याचिका में मुख्य रूप से भाजपा के निर्वाचित उम्मीदवार महेश केवट के निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि यदि उनका नामांकन गलत तरीके से निरस्त नहीं किया जाता, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया अलग होती।
तीनों सांसदों को नोटिस क्यों?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केवल महेश केवट ही नहीं, बल्कि भाजपा के अन्य निर्वाचित सांसद तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
अदालत का मानना है कि इस चुनाव याचिका पर जो भी अंतिम निर्णय आएगा, उसका प्रभाव केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। इसी कारण तीनों निर्वाचित सांसदों को पक्षकार बनाकर जवाब मांगा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव याचिकाओं में यदि न्यायालय को यह लगता है कि विवाद का असर संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया पर पड़ सकता है, तो संबंधित सभी निर्वाचित उम्मीदवारों को नोटिस देना आवश्यक होता है ताकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन हो सके।
चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी से भी जवाब तलब
हाईकोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी को भी नोटिस जारी किया है।
अब आयोग और निर्वाचन अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि किन आधारों पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया गया था और क्या निर्वाचन नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था।
इस जवाब के आधार पर अदालत आगे यह तय करेगी कि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया विधिसम्मत थी या नहीं।
प्रारंभिक सुनवाई में कांग्रेस का पक्ष
मंगलवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता तथा अधिवक्ता आर्यन गुप्ता ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नामांकन निरस्त करने का निर्णय कानूनी रूप से उचित नहीं था और इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
चुनाव याचिका में क्या है मांग?
मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका में प्रमुख रूप से निम्न मांगें की गई हैं—
उनका नामांकन निरस्त करने के निर्णय की न्यायिक समीक्षा की जाए।
निर्वाचन अधिकारी की कार्रवाई को कानून के अनुरूप परखा जाए।
भाजपा उम्मीदवार महेश केवट के निर्वाचन को निरस्त किया जाए।
चुनाव प्रक्रिया में यदि कोई कानूनी त्रुटि पाई जाती है तो उसके अनुसार उचित आदेश पारित किए जाएं।
हालांकि, अंतिम निर्णय हाईकोर्ट द्वारा सभी पक्षों के जवाब और विस्तृत सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।
11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी, जिसमें चुनाव आयोग, निर्वाचन अधिकारी और तीनों निर्वाचित सांसदों का पक्ष अदालत के सामने आएगा।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक उम्मीदवार के नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्वाचन कानूनों के अनुपालन से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस प्रकरण पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों की भी नजर बनी हुई है।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
राज्यसभा चुनाव सामान्यतः प्रत्यक्ष मतदान के बजाय निर्वाचित विधायकों द्वारा किए जाते हैं, इसलिए उम्मीदवारों के नामांकन की वैधता का विशेष महत्व होता है। यदि अदालत किसी नामांकन निरस्तीकरण को अवैध ठहराती है, तो उसके दूरगामी प्रभाव चुनाव परिणामों पर भी पड़ सकते हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट ने किसी भी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब 11 सितंबर की सुनवाई में दाखिल होने वाले जवाब और दलीलों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस