एक्शन मोड में सीएम डॉ. मोहन यादव: जन-विश्वास अभियान की शुरुआत के साथ CMHO, तहसीलदार और पटवारी सस्पेंड, हर शुक्रवार लगेगा जनता दरबार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को छिंदवाड़ा से ‘जनविश्वास अभियान-2026’ की शुरुआत की। जनता की शिकायतों पर सुनवाई के दौरान सीएम ने सीएमएचओ, तहसीलदार समेत तीन अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए और हर शुक्रवार को अफसरों के फील्ड में रहने की निर्देश दिए।
एमपी के छिंदवाड़ा में जन विश्वास अभियान के पहले ही दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव एक्शन मोड में नजर आए. कार्यक्रम के दौरान नागरिकों की समस्या सुनते समय सीएम मोहन यादव ने तत्काल प्रभाव से सीएमएचओ डॉ नरेश गुन्नाड़े, तहसीलदार और पटवारी को सस्पेंड कर दिया. साथ ही, कई अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय भी लिया है.
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने जनता और शासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से शुक्रवार से राज्यव्यापी 'मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' की शुरुआत कर दी। अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा से किया। इस दौरान मुख्यमंत्री एक्शन मोड में नजर आए और शिकायतों की सुनवाई करते हुए छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गुन्नाड़े, एक तहसीलदार और एक पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया कि लापरवाही और जनता की शिकायतों के प्रति उदासीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय स्थित लोक सेवा केंद्र के निरीक्षण से की। उन्होंने यहां उपलब्ध सेवाओं, नागरिक सुविधाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों से विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की जानकारी ली और लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आम नागरिकों से भी बातचीत की और उनसे सीधे फीडबैक प्राप्त किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उद्यमियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास, औद्योगिक संभावनाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक जरूरतों के अनुसार विकास की दिशा तय करना है।
कार्यक्रम के दौरान जब विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने आईं तो उन्होंने तत्काल अधिकारियों से जवाब-तलब किया। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने और कार्यों में लापरवाही सामने आने पर मुख्यमंत्री ने सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाड़े, संबंधित तहसीलदार और पटवारी को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दे दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं का समय पर समाधान करना हर अधिकारी की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज छिंदवाड़ा से शुरू हुआ 'जन-विश्वास अभियान' प्रदेश में शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर सीधे जनता से संवाद करेंगे। लोगों की समस्याएं सुनेंगे और उनके सुझावों के आधार पर भविष्य की योजनाएं एवं नीतियां तैयार की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं बल्कि उनका मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करना है। जनता की आवश्यकताओं को समझकर उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा, जिससे लोगों का सरकार पर विश्वास और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अब हर शुक्रवार को प्रदेश में 'नो मीटिंग डे' रहेगा। इस दिन मंत्रालय और जिला स्तर पर अनावश्यक बैठकों के बजाय अधिकारी और जनप्रतिनिधि सीधे जनता के बीच पहुंचेंगे। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक जनता दरबार आयोजित किए जाएंगे, जहां मंत्री, विधायक, कलेक्टर, कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे।
उन्होंने बताया कि जन-विश्वास अभियान चार प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है—संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही चार स्तंभ सरकार की कार्यशैली की पहचान बनेंगे। प्रशासन का उद्देश्य केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं को समझना और उनका समयबद्ध समाधान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने इस प्रकार का व्यापक जन-विश्वास अभियान शुरू किया है। इस अभियान के माध्यम से सरकार गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर जनता की अपेक्षाओं को समझेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सरकार की सफलता जनता के विश्वास पर ही निर्भर करती है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के समग्र विकास की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। सरकार प्राकृतिक खेती, पशुपालन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे मॉडल को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं पशुपालन और ग्रामीण पर्यटन जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होंगी। सरकार इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा के उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से भी सुझाव लिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्राप्त सुझावों को प्रदेश की विकास योजनाओं में शामिल किया जाएगा ताकि योजनाएं अधिक प्रभावी और जनहितकारी बन सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए तथा जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाए।
उन्होंने कहा कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए प्रशासन को सक्रिय और जवाबदेह बनाना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यदि किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती जाती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जन-विश्वास अभियान की शुरुआत के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार अब जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान करेगी। छिंदवाड़ा में अधिकारियों पर हुई तत्काल कार्रवाई और हर शुक्रवार जनता दरबार लगाने की घोषणा को प्रशासनिक जवाबदेही और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस अभियान से आम नागरिकों को त्वरित राहत मिलेगी, शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस