फेसलेस रजिस्ट्री में बड़ा बदलाव: अब नहीं अटकेगा रजिस्ट्री का काम, प्रदेश का कोई भी सब-रजिस्ट्रार करेगा ऑनलाइन पंजीयन
मध्य प्रदेश सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को और तेज और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया है। दरअसल अब किसी जिले में काम का दबाव ज्यादा होने पर आपकी फेसलेस रजिस्ट्री की फाइल दूसरे जिले के उपलब्ध सब-रजिस्ट्रार के पास भेजी जा सकेगी।
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन के बाद लागू हुआ नया नियम
अब पूरे प्रदेश में बढ़ा सब-रजिस्ट्रारों का अधिकार क्षेत्र
साइबर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की सफलता के बाद बड़ा फैसला
अब नहीं अटकेगी फाइल, उपलब्ध अधिकारी करेगा तुरंत पंजीयन
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने आम लोगों को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक रजिस्ट्री सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नया नियम लागू किया है। अब प्रदेश का कोई भी सब-रजिस्ट्रार किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि किसी जिले में काम का दबाव अधिक है और वहां फाइलें लंबित हैं, तो उपलब्ध अधिकारी दूसरे जिले से उन फाइलों का निपटारा कर सकेंगे। इससे रजिस्ट्री का काम रुकने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
सरकार का उद्देश्य लंबित मामलों की संख्या कम करना, ऑनलाइन सेवाओं को अधिक तेज और प्रभावी बनाना तथा नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था के लागू होने से प्रदेशभर में फेसलेस रजिस्ट्री प्रणाली अधिक मजबूत और सुगम बनने की उम्मीद है।
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन के बाद लागू हुआ नया नियम
राज्य सरकार ने रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-6 में संशोधन के बाद यह व्यवस्था लागू की है। संशोधन के अनुसार पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र अब पूरे मध्य प्रदेश के सभी उपजिलों तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि यह व्यवस्था केवल फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों के पंजीयन तक ही सीमित रहेगी।
इस बदलाव के बाद किसी भी जिले का सब-रजिस्ट्रार प्रदेश के किसी भी जिले से प्राप्त फेसलेस दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीयन कर सकेगा। इससे कार्य का संतुलित वितरण होगा और किसी एक जिले पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ेगा।
साइबर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की सफलता के बाद लिया गया फैसला
मध्य प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में साइबर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की शुरुआत की थी। इस कार्यालय के माध्यम से अब तक 10 हजार से अधिक दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इस अनुभव के आधार पर सरकार ने अब अधिकार क्षेत्र का विस्तार करते हुए पूरे प्रदेश में यह नई व्यवस्था लागू की है।
सरकार का मानना है कि यदि किसी जिले में अधिकारियों की कमी हो या आवेदन अधिक हों, तो दूसरे जिले के उपलब्ध अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से उन फाइलों का पंजीयन कर सकेंगे। इससे नागरिकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज हो जाएगी।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे अधिक लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। पहले जिन जिलों में रजिस्ट्री के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आते थे, वहां फाइलें कई दिनों तक लंबित रहती थीं। अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि सिस्टम स्वतः उपलब्ध अधिकारी के पास फाइल भेज देगा।
इस व्यवस्था के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं—
रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
लंबित फाइलों का तेजी से निपटारा होगा।
लोगों को बार-बार रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
ऑनलाइन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होगी।
सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
समयबद्ध सेवाएं मिलने से नागरिकों को राहत मिलेगी।
अधिकारी उपलब्ध होने पर किसी भी जिले से दस्तावेजों का पंजीयन संभव होगा।
सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यकुशलता भी बढ़ेगी और प्रदेशभर में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
75 प्रकार के दस्तावेज होंगे फेसलेस तरीके से पंजीकृत
नई फेसलेस व्यवस्था के अंतर्गत अब 75 प्रकार के दस्तावेज ऑनलाइन पंजीकृत किए जा सकेंगे। इनमें प्रमुख रूप से—
रजिस्टर्ड लीज
पट्टा विलेख
प्रॉपर्टी एग्रीमेंट
प्रशासन बंध-पत्र
शपथ-पत्र
दत्तक ग्रहण संबंधी दस्तावेज
बैंक गारंटी नवीनीकरण
विक्रय प्रमाण-पत्र
वसीयत
तलाक विलेख
क्षतिपूर्ति बंध-पत्र
शेयर आवंटन पत्र
सहित कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं। इससे नागरिकों को विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी।
आधार अनिवार्य, एआई करेगा पहचान का सत्यापन
फेसलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का उपयोग किया है। दस्तावेजों के पंजीयन के दौरान आवेदक के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य होगा।
प्रक्रिया के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इस रिकॉर्डिंग के माध्यम से आवेदक की पहचान का मिलान आधार के साथ-साथ वोटर आईडी, पैन कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे वैध पहचान पत्रों से किया जाएगा।
यदि सभी जानकारियां सही पाई जाती हैं, तभी साइबर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होगी। इससे फर्जीवाड़े और पहचान संबंधी विवादों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
ई-केवाईसी और ई-साइन के बाद ही होगा पंजीयन
सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से फेसलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया को कई चरणों में तैयार किया है। दस्तावेज पंजीयन से पहले आवेदक को ई-केवाईसी और ई-साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके अलावा आवेदकों को यह भी डिजिटल घोषणा करनी होगी कि वे किसी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या मजबूरी में नहीं हैं तथा अपनी स्वतंत्र इच्छा से दस्तावेज का पंजीयन करा रहे हैं। यह प्रावधान भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों को कम करने में भी सहायक माना जा रहा है।
संपदा-2.0 सॉफ्टवेयर के माध्यम से मिलेगी सुविधा
फेसलेस रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया संपदा-2.0 सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित की जाएगी। यह सॉफ्टवेयर दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच, पहचान सत्यापन, वीडियो रिकॉर्डिंग, ई-साइन और अंतिम पंजीयन जैसी सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से पूरा करेगा।
प्रदेश में वर्तमान में कुल 141 प्रकार के दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है, जिनमें से पहले चरण में 75 प्रकार के दस्तावेज फेसलेस व्यवस्था के तहत शामिल किए गए हैं। भविष्य में इस दायरे को और बढ़ाने की संभावना भी जताई जा रही है।
डिजिटल शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था केवल नागरिकों को सुविधा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधार की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे सरकारी कार्यालयों में भीड़ कम होगी, अधिकारियों के कार्यभार का बेहतर प्रबंधन होगा और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सरकार रजिस्ट्री सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी की संभावनाएं भी कम होंगी।
मध्य प्रदेश सरकार की नई फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। अब किसी जिले में अधिकारियों की कमी या काम के अधिक दबाव के कारण रजिस्ट्री लंबित नहीं रहेगी। प्रदेश का कोई भी उपलब्ध सब-रजिस्ट्रार ऑनलाइन माध्यम से दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। एआई आधारित सत्यापन, ई-केवाईसी, ई-साइन और संपदा-2.0 जैसी डिजिटल सुविधाओं के साथ यह व्यवस्था न केवल तेज और पारदर्शी होगी, बल्कि नागरिकों के समय और खर्च दोनों की बचत भी करेगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस का एक मजबूत और प्रभावी मॉडल साबित हो सकती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस