आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में लापरवाही पर डीएम का बड़ा एक्शन, 24 अधिकारियों का अगस्त माह का वेतन रोका, 4 एसडीएम से मांगा जवाब
उरई में आईजीआरएस, जनसुनवाई पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही मिलने पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने बड़ी कार्रवाई की है। 24 अधिकारियों का अगस्त 2026 का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया गया है, जबकि 4 उपजिलाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। डीएम ने स्पष्ट किया कि जनशिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनशिकायतों के निस्तारण में ढिलाई पर सख्त हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, कहा— शासन की प्राथमिकताओं से समझौता नहीं होगा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें।
उरई। जनपद जालौन में जनशिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने सख्त प्रशासनिक रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। आईजीआरएस पोर्टल, जनसुनवाई पोर्टल तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने 24 अधिकारियों के अगस्त 2026 माह के वेतन आहरण पर तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही चार उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जुलाई 2026 में विभिन्न विभागों को प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की विभागवार समीक्षा की। बैठक में आईजीआरएस पोर्टल, जनसुनवाई पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की गुणवत्ता, समयसीमा और समाधान की वास्तविक स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया गया। समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई अधिकारियों ने शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और कई मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई कर शिकायतों का निस्तारण दर्शा दिया गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की मंशा है कि प्रत्येक नागरिक की शिकायत का समयबद्ध, पारदर्शी और संतोषजनक समाधान किया जाए। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही के कारण आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनशिकायतों का निस्तारण केवल सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता के प्रति प्रशासन की जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समीक्षा में पाया गया कि कुल 28 अधिकारियों द्वारा शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निस्तारण में गंभीर लापरवाही बरती गई। इस पर जिलाधिकारी ने चार उपजिलाधिकारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए, जबकि विभिन्न विभागों के 24 अधिकारियों के अगस्त माह के वेतन पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सजग बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि आईजीआरएस, जनसुनवाई पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत की व्यक्तिगत स्तर पर निगरानी करें। शिकायतकर्ता से संपर्क स्थापित कर वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा केवल पोर्टल पर जवाब अपलोड कर औपचारिकता पूरी करने की प्रवृत्ति से बचा जाए। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है। कई बार देखने में आता है कि बिना स्थलीय सत्यापन या पर्याप्त जांच के शिकायतों को निस्तारित कर दिया जाता है, जिससे शिकायतकर्ता पुनः शिकायत दर्ज कराने को मजबूर होता है। ऐसी स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष परीक्षण कर उसका स्थायी समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076, आईजीआरएस और जनसुनवाई पोर्टल सरकार और जनता के बीच विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर दर्ज शिकायतों के माध्यम से आम नागरिक अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचाते हैं। इसलिए इन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि सभी लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए और प्रत्येक शिकायत की समयसीमा का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी शिकायत के समाधान में तकनीकी या कानूनी बाधा हो तो उसकी स्पष्ट जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसे अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में पारदर्शी, जवाबदेह और जनोन्मुखी प्रशासन शामिल है। प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है कि वह अपने विभाग से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समय पर उनका समाधान करे। भविष्य में यदि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध और भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डीएम की इस सख्त कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे न केवल शिकायत निस्तारण व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक गंभीर होंगे। जनपद में अब सभी विभागों को स्पष्ट संदेश मिल गया है कि जनशिकायतों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस