जेल में फायरिंग से हड़कंप, हत्या के आरोपित ने प्रहरी को देसी तमंचे से मारी गोली; अधीक्षक निलंबित

रायसेन जिला जेल में हत्या के आरोपी बंदी नीलेश ठाकुर ने भागने की कोशिश में प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर को देसी तमंचे से गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद कार्यवाहक जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया।

जेल में फायरिंग से हड़कंप, हत्या के आरोपित ने प्रहरी को देसी तमंचे से मारी गोली; अधीक्षक निलंबित

रायसेन के जिला जेल के अंदर गोलीकांड के आरोप में बंद विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी पर गोली चला दी। इस हमले में प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद भोपाल रेफर किया गया है।

रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिला जेल में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब जेल के अंदर एक विचाराधीन कैदी ने ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरी पर कथित तौर पर देसी तमंचे से फायरिंग कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गोली लगने से जेल प्रहरी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद भोपाल रेफर किया गया है। घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि हमला करने वाला कैदी नीलेश निर्वेदी है। वह बरेली के पास दिमाड़ा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और धारा 307 के मामले में विचाराधीन कैदी के रूप में जिला जेल में बंद है। सुबह के समय वह किसी तरह हथियार लेकर जेल प्रहरी के पास पहुंचा और अचानक फायरिंग कर दी।

फलों की टोकरी लेने के बहाने पहुंचा कैदी

जानकारी के अनुसार, जिला जेल में गुरुवार को स्कूली बच्चों से जुड़ा एक कार्यक्रम आयोजित होना था। इसी कार्यक्रम के लिए फलों की टोकरी लेने के बहाने कैदी नीलेश निर्वेदी जेल प्रहरी के पास पहुंचा था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान उसने अचानक जेल प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर पर गोली चला दी।

अचानक गोली चलने से जेल परिसर में मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों में दहशत फैल गई। किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। गोली लगने के बाद प्रहरी गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। घटना के बाद जेल में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने तत्काल घायल प्रहरी को उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया।

जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने घायल प्रहरी की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार किया। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर कर दिया गया। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

जेल के अंदर हथियार पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सबसे अहम सवाल यही है कि आखिर एक विचाराधीन कैदी के पास देसी तमंचा और गोली कैसे पहुंची? जेल परिसर में प्रवेश और कैदियों की निगरानी के लिए सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद कैदी तक हथियार पहुंचना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

जेल प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि हथियार जेल के अंदर कैसे पहुंचा। क्या कैदी को किसी जेलकर्मी की मदद मिली? क्या किसी बाहरी व्यक्ति ने उसे हथियार उपलब्ध कराया? या फिर जेल में तलाशी और निगरानी व्यवस्था में कोई बड़ी चूक हुई? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

घटना के बाद जेल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों ने भी गंभीरता दिखाई है। जेल के अंदर कैदियों की गतिविधियों, हथियार की बरामदगी और घटना से पहले की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

कार्यवाहक जेल अधीक्षक निलंबित

घटना की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की है। कार्यवाहक जेल अधीक्षक आरके चौरे को निलंबित कर दिया गया है। उनके निलंबन के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बताया गया है कि मामले की जांच आईजी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेंगे। इसमें कैदी के पास हथियार पहुंचने, जेल के भीतर उसकी गतिविधियों, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था की जांच शामिल है।

जांच में सामने आएगा हथियार का राज

जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि देसी तमंचा जेल परिसर में कैसे पहुंचा। जेल जैसे हाई-सिक्योरिटी परिसर में कैदियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाती है। ऐसे में किसी कैदी के पास हथियार पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता की ओर इशारा करता है।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि घटना से पहले कैदी किस-किस स्थान पर गया था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग आए थे। साथ ही जेल में मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

अगर जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, अगर हथियार जेल के बाहर से किसी व्यक्ति के माध्यम से पहुंचाए जाने की बात सामने आती है तो उस दिशा में भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

गोली चलने के बाद जेल में मचा हड़कंप

घटना के दौरान गोली चलने की आवाज से जेल परिसर में अचानक अफरा-तफरी मच गई। जेल में तैनात अन्य कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को जब घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। घायल प्रहरी को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

घटना के बाद जेल परिसर की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल और उससे जुड़े स्थानों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कैदी के पास हथियार कब और किस तरीके से पहुंचा।

विचाराधीन कैदी पर पहले से गंभीर आरोप

फायरिंग करने का आरोप जिस कैदी पर लगा है, वह पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले में जेल में बंद है। जानकारी के मुताबिक, नीलेश निर्वेदी के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज है। धारा 307 हत्या के प्रयास से संबंधित है।

अब जेल के अंदर प्रहरी पर गोली चलाने की घटना ने उसके खिलाफ एक और गंभीर मामला खड़ा कर दिया है। पुलिस और जेल प्रशासन घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कैदी ने हथियार कहां से हासिल किया और फायरिंग के पीछे उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।

प्रशासन ने शुरू की जांच

रायसेन जिला जेल में हुई इस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कार्यवाहक जेल अधीक्षक आरके चौरे के निलंबन के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

आईजी रैंक के अधिकारी को जांच सौंपे जाने से माना जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच रिपोर्ट में यदि सुरक्षा व्यवस्था में खामियां सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर आगे भी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल घायल जेल प्रहरी का उपचार भोपाल में कराया जा रहा है। वहीं, आरोपी विचाराधीन कैदी से घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। जेल प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जाए और भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

रायसेन जिला जेल में हुई इस सनसनीखेज फायरिंग ने जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों तक प्रतिबंधित सामान पहुंचने के सवाल को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि हथियार जेल के भीतर कैसे पहुंचा और इस गंभीर सुरक्षा चूक के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है।