एक दर्जन कंप्यूटर ऑपरेटर और 40 पत्रकारों के साथ नगर पालिका पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, ईओ पर घूस की पेशकश का आरोप
उरई नगर पालिका में अनियमितताओं की जांच के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही एक दर्जन कंप्यूटर ऑपरेटरों और करीब 40 पत्रकारों के साथ पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिशासी अधिकारी ने जांच में सहयोग नहीं किया, आवश्यक अभिलेख देने से इनकार किया और उन्हें घूस देने की भी कोशिश की
उरई नगर पालिका में जांच के दौरान बड़ा विस्फोट, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने ईओ पर घूस की पेशकश का लगाया सनसनीखेज आरोप
नगर पालिका जांच में मचा प्रशासनिक भूचाल, रिकॉर्ड देने से इनकार के बीच ईओ पर रिश्वत की पेशकश का आरोप
उरई नगर पालिका में हाई-प्रोफाइल जांच से हड़कंप, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के गंभीर आरोपों से मचा बवाल
जांच के घेरे में उरई नगर पालिका, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बोले— रिकॉर्ड रोके, घूस देकर जांच प्रभावित करने की हुई कोशिश
उरई। नगर पालिका परिषद उरई में पिछले कई दिनों से चल रही जांच बुधवार को उस समय सुर्खियों में आ गई, जब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही एक दर्जन कंप्यूटर ऑपरेटरों और लगभग 40 पत्रकारों की मौजूदगी में नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। जांच के दौरान उन्होंने अधिशासी अधिकारी (ईओ) राम अचल कुरील पर न केवल जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया, बल्कि घूस देने की पेशकश किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया। पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर पालिका कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और कई अधिकारी कथित रूप से कार्यालय छोड़कर चले गए।
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका के सभासदों द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लगभग 15 दिन पहले तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति के अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य बनाए गए, जबकि उप जिलाधिकारी सदर उत्तम तिवारी और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को सदस्य नामित किया गया।
बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने नगर पालिका प्रशासन से कई बार पत्राचार कर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिशासी अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए और जांच में सहयोग करने से लगातार बचा जाता रहा। इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पूर्व निर्धारित तिथि घोषित करते हुए कहा था कि यदि नगर पालिका प्रशासन सहयोग नहीं करेगा तो 29 जुलाई को कंप्यूटर ऑपरेटरों की टीम के साथ रिकॉर्ड की स्क्रीनिंग की जाएगी तथा पूरी कार्रवाई मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अपने दल के साथ नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद थे। सबसे पहले उन्होंने अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील के कक्ष में पहुंचकर पिछले तीन वर्षों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की। आरोप है कि अधिशासी अधिकारी ने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से साफ इनकार कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिशासी अधिकारी ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जांच का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड नहीं दिया जा सकता। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने जवाब दिया कि यदि जिलाधिकारी स्वयं ऐसा निर्देश देंगे तो वह उसका अक्षरशः पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पद और जांच समिति के सदस्य के रूप में रिकॉर्ड देखने के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कर अधिकारी एवं लेखा अधिकारी के कक्ष में पहुंचे। शुरुआत में कक्ष बंद मिला। कुछ देर बाद अधिकारी पहुंचे तो उनसे चेक बुक, भुगतान संबंधी अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने यह कहते हुए रिकॉर्ड देने से मना कर दिया कि यह गोपनीय दस्तावेज हैं और इनकी स्क्रीनिंग नहीं कराई जा सकती।
इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि जो दस्तावेज सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के दायरे में आते हैं, उनकी रिकॉर्डिंग और स्क्रीनिंग पूरी तरह वैधानिक है। उनका कहना था कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए रिकॉर्डिंग कराई जा रही है।
जांच के दौरान स्थिति तब और अधिक विवादित हो गई जब आरोप है कि अधिशासी अधिकारी कार्यालय के पिछले दरवाजे से बाहर निकलकर चले गए। कुछ देर बाद कर अधिकारी गणेश प्रसाद के भी चुपचाप कार्यालय छोड़ने की बात सामने आई। वहीं कर्मचारियों द्वारा एक कमरे को अंदर से बंद कर लेने का भी आरोप लगाया गया। काफी प्रयासों के बावजूद वह कमरा नहीं खोला गया। इस दौरान जांच समिति के अन्य सदस्य भी मौके पर मौजूद नहीं थे।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दोपहर लगभग एक बजे से शाम छह बजे तक नगर पालिका परिसर में डटे रहे। आरोप है कि इस दौरान अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय से अनुपस्थित रहे। उपलब्ध कराए गए सीमित अभिलेखों की स्क्रीनिंग कराई गई, लेकिन कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जांच टीम को नहीं दिए गए। समाचार लिखे जाने तक ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नगर पालिका कार्यालय में मौजूद थे और दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
इसी बीच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने मीडिया से बातचीत में एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से अधिशासी अधिकारी की ओर से उन्हें घूस देने की पेशकश की गई, जिसे उन्होंने सख्ती से ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि पूरी जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप कराई जाएगी तथा यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
हालांकि, अधिशासी अधिकारी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में घूस की पेशकश और जांच में बाधा डालने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। मामले को लेकर नगर पालिका और प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा बनी हुई है। अब सभी की निगाहें जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस