लोकसभा से पास हुआ एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल, दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान

लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. मॉनसून सत्र में लंबी चर्चा के बाद ध्वनि मत से यह बिल पास हो गया है. हालांकि बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नोकझोंक हुई. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर दोनों पक्षों में खूब तनातनी दिखी. स्पीकर ओम बिरला ने एंटी पेपर लीक बिल के पारित होने का ऐलान किया और कल तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.

लोकसभा से पास हुआ एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल, दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान

लोकसभा ने लंबी चर्चा और तीखी बहस के बाद एंटी पेपर लीक बिल को ध्वनि मत से पारित हो गया है.

नई दिल्ली। लोकसभा ने लंबी बहस और विपक्ष के हंगामे के बीच बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। बिल पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सरकार का कहना है कि यह संशोधन 2024 में बने एंटी-पेपर लीक कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है। पिछले वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग को देखते हुए इस कानून को और मजबूत किया गया है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार अनुभवों से सीखते हुए कानूनों को और प्रभावी बना रही है। उन्होंने कहा कि 2024 में कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं और सरकार ने पेपर लीक के मामलों में तेजी से कार्रवाई की है। उनका कहना था कि नए संशोधन से परीक्षा माफिया पर निर्णायक प्रहार होगा और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।

संशोधन विधेयक के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। अब राज्य सरकारें या यूटी प्रशासन इस कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन कर सकेंगे। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।

कानून में जांच प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है। प्रावधान के अनुसार, इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही, केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार भी मिलेगा।

राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में एक या एक से अधिक विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है, ताकि मुकदमों की प्रभावी पैरवी हो सके। इसके अलावा, किसी भी निर्णय, सजा या आदेश के खिलाफ अपील सीधे हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ में की जा सकेगी और अपील स्वीकार होने के बाद तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करने का प्रावधान किया गया है।

नए संशोधन में सजा और जुर्माने को भी काफी कठोर बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल या उससे जुड़े अपराध में दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की कैद हो सकती है। इसके साथ ही दोषी पर अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

यदि अपराध किसी संगठित गिरोह, संस्था या नेटवर्क द्वारा किया जाता है तो सजा और भी सख्त होगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की कैद का प्रावधान रखा गया है, जबकि जुर्माना अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक लगाया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), रेलवे भर्ती परीक्षाओं, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं तथा केंद्र सरकार की अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि लाखों युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है, इसलिए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में राजनीतिक टकराव भी देखने को मिला। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया था। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया और कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को गृह मंत्री की मंजूरी प्राप्त थी।

राहुल गांधी के इस बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। सदन में कुछ समय के लिए भारी हंगामा हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए राहुल गांधी से कहा कि वे अपने आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करें, क्योंकि चर्चा का विषय गृह मंत्री नहीं बल्कि एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है और राहुल गांधी को अपने बयान के लिए सदन से माफी मांगनी चाहिए। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

हालांकि हंगामे के बावजूद सरकार ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित करा लिया। सरकार का दावा है कि यह कानून देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाएगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून कठोर बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।

अब लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी करेगा। कानून लागू होने के बाद पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा घोटालों के खिलाफ कार्रवाई पहले से कहीं अधिक सख्त और समयबद्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है।