खून से लथपथ वकील ने अस्पताल में मचाया हंगामा, पुलिस की वर्दी भी खून से सनी: बुढ़ार में अधिवक्ता की पिटाई का आरोप, सिर फटा और कान में आई चोट; बीच-बचाव करने वाले साथी भी घायल

शहडोल के बुढ़ार में एक वकील खून से लथपथ हालत में अस्पताल पहुंचा और हंगामा किया। पुलिस की वर्दी भी खून से सनी नजर आई। वकील ने पुलिसकर्मियों पर लाठी-डंडों से पीटने का आरोप लगाया है।

खून से लथपथ वकील ने अस्पताल में मचाया हंगामा, पुलिस की वर्दी भी खून से सनी: बुढ़ार में अधिवक्ता की पिटाई का आरोप, सिर फटा और कान में आई चोट; बीच-बचाव करने वाले साथी भी घायल

दुर्गा पंडाल में हिसाब-किताब के बाद बस स्टैंड पहुंचे थे अधिवक्ता

पुलिस वाहन से पहुंचे कर्मचारियों ने अधिवक्ता को रोका

पूछताछ के दौरान बढ़ा विवाद, लाठी-डंडों से पीटने का आरोप

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार में पुलिस और अधिवक्ता के बीच विवाद का मामला सामने आया है। पुलिसकर्मियों पर अधिवक्ता अभिनव पाठक के साथ लाठी-डंडों से बेरहमी से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। कथित मारपीट में अधिवक्ता का सिर फट गया, कान में चोट आई और शरीर के कई हिस्सों पर डंडों के निशान पड़ गए। घटना के बाद घायल अधिवक्ता खून से लथपथ हालत में अस्पताल पहुंचे। वहां उनकी हालत और शरीर पर लगी चोटों को देखकर मामला चर्चा में आ गया।

घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिवक्ता के खून से पुलिसकर्मियों की वर्दी भी सनी होने की बात सामने आई है। वहीं, अधिवक्ता के साथ मौजूद उनके साथियों ने भी बीच-बचाव के दौरान पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस की ओर से मामले का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि अधिवक्ता उनके साथ अभद्रता और झूमाझपटी कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें बचाव में कार्रवाई करनी पड़ी।

दुर्गा पंडाल में हिसाब-किताब के बाद बस स्टैंड पहुंचे थे अधिवक्ता

मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी बस्ती निवासी अधिवक्ता अभिनव पाठक अपने कुछ साथियों के साथ दुर्गा पंडाल में हिसाब-किताब का काम निपटाने के बाद बुढ़ार बस स्टैंड के पास पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान अधिवक्ता फोन पर किसी से बातचीत कर रहे थे। तभी पुलिस वाहन से बुढ़ार थाने के कुछ कर्मचारी वहां पहुंचे और अधिवक्ता को रोक लिया।

पुलिसकर्मियों द्वारा रोकने के बाद उनसे पूछताछ की जाने लगी। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत ने विवाद का रूप ले लिया। आरोप है कि देखते ही देखते पुलिसकर्मियों ने अधिवक्ता के साथ मारपीट शुरू कर दी और उन पर लाठी-डंडे बरसाए। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

सिर फटा, कान में चोट और शरीर पर पड़े डंडों के निशान

अधिवक्ता अभिनव पाठक के साथ कथित मारपीट इतनी गंभीर बताई जा रही है कि उनके सिर में चोट लगने से खून बहने लगा। कान में भी चोट आई और शरीर के कई हिस्सों पर लाठियों के निशान पड़ गए। घायल अधिवक्ता को देखकर घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता था।

घटना के बाद अधिवक्ता अस्पताल पहुंचे, जहां उनकी हालत और शरीर पर लगी चोटों को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। खून से लथपथ अधिवक्ता के अस्पताल पहुंचने के मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीच-बचाव करने पहुंचे साथियों के साथ भी मारपीट का आरोप

बताया जा रहा है कि जब अधिवक्ता के साथ मारपीट हो रही थी, तब उनके साथी बीच-बचाव करने के लिए आगे आए। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथियों को भी नहीं बख्शा और उनके साथ भी मारपीट की। इस दौरान कुछ अन्य लोगों को भी चोटें आने की बात सामने आई है।

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अधिवक्ता और पुलिसकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, तो उसे शांत कराने के लिए क्या उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती थी? क्या विवाद की स्थिति में लाठी-डंडों का इस्तेमाल जरूरी था? वहीं, बीच-बचाव करने पहुंचे लोगों के घायल होने की जिम्मेदारी किसकी होगी?

पुलिस का पक्ष- अधिवक्ता कर रहे थे अभद्रता और झूमाझपटी

दूसरी ओर, पुलिसकर्मियों की तरफ से सामने आए पक्ष में अधिवक्ता पर ही अभद्रता और झूमाझपटी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि अधिवक्ता पुलिसकर्मियों के साथ विवाद कर रहे थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बचाव में कार्रवाई करनी पड़ी।

हालांकि, दोनों पक्षों के आरोपों के बीच घटना की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला पुलिस और अधिवक्ता के बीच हुए विवाद को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

एसडीओपी बोले- शिकायत मिलने पर की जाएगी वैधानिक कार्रवाई

मामले को लेकर धनपुरी एसडीओपी विकास पांडेय ने बताया कि घटना उनके संज्ञान में आई है। फिलहाल इस संबंध में अभी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर मामले में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस की ओर से घटना के सभी पहलुओं को देखने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद सामने आएगी मारपीट की पूरी सच्चाई

बुढ़ार की इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली और आम नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब मामला एक अधिवक्ता और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद से जुड़ा हो। अधिवक्ता के घायल होने, उनके साथियों के साथ कथित मारपीट और पुलिस की वर्दी पर खून लगने की बात सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच में किसकी गलती सामने आती है। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना की विस्तृत जांच का इंतजार है।