रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन, वायरल बयान के बाद जल संसाधन विभाग के EE सीबी अहिरवार निलंबित: बोले थे- ‘मैं परसेंटेज नहीं लेता, जो खुशी से दे दे वो लेता हूं’; लोकायुक्त ने 45 हजार की रिश्वत लेते 2 कर्मचारियों को पकड़ा
पन्ना में लोकायुक्त ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. इसके बाद विवादित बयान देने वाले कार्यपालन यंत्...
पन्ना में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) सी.बी. अहिरवार के विवादित बयान का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में अधिकारी यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि "मेरा कोई परसेंटेज फिक्स नहीं है, बल्कि कोई खुशी से देता है तो मैं रख लेता हूं"।
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग से जुड़ा रिश्वतखोरी का मामला अब बड़े प्रशासनिक एक्शन तक पहुंच गया है। विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किए जाने के बाद कार्यपालन यंत्री (EE) सीबी अहिरवार का कथित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहे हैं कि, ‘मैं परसेंटेज नहीं लेता, जो खुशी से दे दे वो लेता हूं।’ वीडियो सामने आने और मामले ने तूल पकड़ने के बाद मध्य प्रदेश शासन ने कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इस पूरे मामले ने जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में दो कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए, वहीं दूसरी तरफ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कथित बयान चर्चा का विषय बन गया। शासन ने उनके मीडिया में दिए गए वक्तव्य को सिविल सेवा आचरण नियमों के प्रतिकूल और अशोभनीय मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।
45 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए दो कर्मचारी
मामले की शुरुआत जल संसाधन विभाग में ठेकेदार से रिश्वत मांगने की शिकायत से हुई थी। बताया गया कि मझगांय बांध की नहर से जुड़े एक बिल को पास कराने के एवज में विभाग के कर्मचारियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। परेशान ठेकेदार ने इसकी शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से की।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त की टीम ने मामले की जांच की और शिकायत की पुष्टि होने पर कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने जिला न्यायालय के सामने स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय में दबिश दी। यहां कार्रवाई के दौरान दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों में लेखपाल दीपक परिहार और लिपिक अरविंद पाठक शामिल हैं। लोकायुक्त टीम ने लेखपाल दीपक परिहार को 15 हजार रुपये और लिपिक अरविंद पाठक को 30 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा। दोनों के पास से कुल 45 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से विभागीय कार्यालय में हड़कंप मच गया। सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने के आरोप ने एक बार फिर सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
EE के बयान ने बढ़ाई विभाग की मुश्किलें
दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार से पत्रकारों ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल किए। इसी दौरान उनका एक कथित बयान सामने आया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा।
वायरल वीडियो में सीबी अहिरवार कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘मैं परसेंटेज नहीं लेता, जो खुशी से दे दे वो लेता हूं।’ इस कथित टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
लोगों ने सवाल उठाए कि यदि सरकारी कार्यालयों में काम कराने के बदले रिश्वत लेने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी? हालांकि, वायरल वीडियो के पूरे संदर्भ और उसकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
लेकिन इस बयान के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला केवल दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा। शासन स्तर पर भी इसे गंभीरता से लिया गया और विभाग ने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की।
30 अक्टूबर को शासन ने जारी किया निलंबन आदेश
मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को आदेश क्रमांक एफ 6/2/0006/2026/पी-2/31 जारी किया। आदेश में सीबी अहिरवार के 28 अक्टूबर को पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को दिए गए वक्तव्य का उल्लेख किया गया है।
शासन के मुताबिक, उनका यह वक्तव्य सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। आदेश में कहा गया कि संबंधित वक्तव्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1) के प्रावधानों के प्रतिकूल है और इसे अशोभनीय आचरण माना गया है।
इसी आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत सीबी अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। शासन के आदेश से स्पष्ट है कि अधिकारी के मीडिया में दिए गए कथित वक्तव्य को प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया गया है।
निलंबन अवधि में भोपाल रहेगा मुख्यालय
निलंबन आदेश के अनुसार, सीबी अहिरवार का निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल निर्धारित किया गया है।
उन्हें निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह आदेश मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार जारी किया गया है। आदेश पर अपर सचिव रवीन्द्र कुमार चौधरी के हस्ताक्षर हैं।
इस तरह वायरल बयान के बाद शासन ने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए कार्यपालन यंत्री को उनके पद से निलंबित कर दिया है।
अब विभागीय जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
पन्ना जल संसाधन विभाग का यह मामला अब कई स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। लोकायुक्त पुलिस द्वारा दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ना, कार्यपालन यंत्री का कथित बयान और उसके बाद शासन की निलंबन कार्रवाई ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी विभागों में बिल पास कराने और दूसरे कामों के लिए लोगों को रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़ता है? यदि किसी कार्यालय में इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं, तो उसकी जिम्मेदारी केवल रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारियों तक सीमित रहनी चाहिए या विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की भी जांच होनी चाहिए?
फिलहाल, शासन की ओर से सीबी अहिरवार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई के बाद रिश्वतखोरी के मामले में आगे की जांच जारी है। अब सभी की निगाहें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह तय होगा कि इस पूरे मामले में आगे किन स्तरों पर जवाबदेही निर्धारित की जाती है।
पन्ना का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही केवल नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार से राहत मिलना भी जरूरी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस