जेल से रिहाई के चंद मिनट बाद आजम खान को ED ने हिरासत में लिया: जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के 494 करोड़ के लेनदेन की जांच तेज, CRPF की मौजूदगी में हुई कार्रवाई; बोले- क्या मुसलमान होने की यही सजा है?

सपा के कद्दावर नेता आजम खान के रामपुर जेल से रिहा होते ही गिरफ्तार हो चुके हैं. उनके रिहाई से पहले ही जेल में सीआरपीएफ के साथ पहुंची ईडी की टीम ने उनके निकलते ही हिरासत में लेने का कागज देकर गिरफ्तार कर लिया.

जेल से रिहाई के चंद मिनट बाद आजम खान को ED ने हिरासत में लिया: जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के 494 करोड़ के लेनदेन की जांच तेज, CRPF की मौजूदगी में हुई कार्रवाई; बोले- क्या मुसलमान होने की यही सजा है?

जेल से रिहा होते ही सपा नेता आजम खान को ED ने हिरासत में लिया। जौहर ट्रस्ट मामले में 494 करोड़ का हिसाब न देने पर बड़ा एक्शन।

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की जेल से रिहाई की खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। रामपुर जेल से बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में करीब 494 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच की जा रही है।

शनिवार को रामपुर जेल के बाहर पहले से ही ईडी अधिकारियों की टीम मौजूद थी। अधिकारियों के साथ अर्धसैनिक बल और सीआरपीएफ के जवान भी तैनात किए गए थे। ईडी की गाड़ियों का काफिला जेल के बाहर खड़ा था। जैसे ही आजम खान जेल की औपचारिकताएं पूरी कर बाहर निकले, जांच एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से वहां मौजूद समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई।

बताया जा रहा है कि ईडी की टीम आजम खान को पूछताछ के लिए गाजियाबाद स्थित ईडी कोर्ट में पेश कर सकती है। हालांकि, आगे की कानूनी प्रक्रिया और पेशी को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

सभी मामलों में रिहाई के परवाने जारी होने के बाद मिली थी राहत

आजम खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान के मुताबिक, उनके खिलाफ चल रहे सभी मुकदमों में रिहाई के परवाने जारी हो चुके थे। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में सेशन ट्रायल के तहत चल रहे पांच मुकदमों में शुक्रवार को ही रिहाई के परवाने जारी कर जेल भेज दिए गए थे।

इसके बाद शनिवार को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को राहत मिल गई। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को जमानत प्रदान की थी। अदालत के आदेश के बाद संबंधित न्यायालय में जमानत की शर्तें पूरी की गईं और रिहाई का परवाना जारी कर दिया गया।

हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद माना जा रहा था कि आजम खान और उनके बेटे की जेल से बाहर आने की राह साफ हो गई है। जेल प्रशासन की ओर से भी आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की गई। लेकिन जेल के दरवाजे से बाहर निकलते ही ईडी की कार्रवाई ने उनकी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ा दीं।

हिरासत में लिए जाने के बाद भावुक हुए आजम खान

जेल से बाहर आते ही ईडी की हिरासत में लिए जाने के बाद आजम खान मीडिया से बातचीत करते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने मौजूदा कानूनी व्यवस्था और अपने खिलाफ हो रही कार्रवाई पर सवाल उठाए। इस दौरान उनके बयान में नाराजगी और पीड़ा दोनों दिखाई दीं।

आजम खान ने कहा, "अब कहने के लिए बचा ही क्या है? मैं क्या कहूं? कानून तो जैसे खत्म ही हो गया है। क्या मुसलमान होने की यही सजा है?"

उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनकी गलती केवल इतनी थी कि उन्होंने एक शैक्षणिक संस्थान बनाया और बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल और विश्वविद्यालय स्थापित किए।

आजम खान ने सवाल उठाते हुए कहा, "हमारी गलती बस इतनी थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यही हमारा गुनाह है? हमने बच्चों के लिए स्कूल बनवाए, क्या यही हमारा गुनाह है?"

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, आजम खान के आरोपों और ईडी की कार्रवाई को लेकर जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के दौरान ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

क्या है जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट का 494 करोड़ रुपये का मामला?

आजम खान के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का संबंध मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से बताया जा रहा है। यह ट्रस्ट रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी के संचालन और उससे जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बनाया गया था। आजम खान इस ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख लोगों में शामिल हैं।

जांच एजेंसी को ट्रस्ट की फंडिंग, बैंक खातों में हुए लेनदेन, जमीनों के अधिग्रहण और विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई धनराशि को लेकर संदेह है। एजेंसी इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन में करीब 494 करोड़ रुपये का मामला सामने आया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी धनराशि कहां से आई, किन स्रोतों से ट्रस्ट को फंडिंग मिली और उसका इस्तेमाल किन कार्यों में किया गया।

ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करना है। एजेंसी यह भी जानना चाहती है कि ट्रस्ट के खातों और निर्माण कार्यों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड में दर्ज रकम का वास्तविक स्रोत क्या है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि 494 करोड़ रुपये का आंकड़ा जांच से जुड़ा है। इसे किसी अदालत द्वारा आजम खान के खिलाफ साबित किया गया अपराध या व्यक्तिगत रूप से उनके द्वारा गबन की गई रकम नहीं माना जा सकता।

14 अक्टूबर को दर्ज हुआ था नया मुकदमा

बताया जा रहा है कि ईडी ने इसी महीने 14 अक्टूबर को आजम खान के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया था। यह मामला जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में दर्ज किया गया।

ईडी लंबे समय से ट्रस्ट को मिली फंडिंग, जमीनों के अधिग्रहण और विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च की गई रकम की जांच कर रही है। इससे पहले भी ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों और अन्य मामलों को लेकर विभिन्न जांच एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं।

अब नया मामला दर्ज होने के बाद ईडी ने जांच तेज कर दी है। जेल से रिहाई के तुरंत बाद आजम खान को हिरासत में लिया जाना इसी जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

बेटे अब्दुल्ला आजम को भी मिली थी राहत

आजम खान के साथ उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान भी पैन कार्ड से जुड़े मामले में आरोपी थे। दोनों को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी।

हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राहत प्रदान की थी। इसके बाद अदालत की शर्तों को पूरा करने पर संबंधित विशेष अदालत ने रिहाई के परवाने जारी किए।

इससे दोनों की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। हालांकि, आजम खान के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों और अब ईडी की नई कार्रवाई ने उनकी कानूनी चुनौतियों को फिर बढ़ा दिया है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

ईडी की हिरासत में लिए जाने के बाद अब आजम खान से जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, फंडिंग के स्रोत, बैंक खातों और जमीनों से जुड़े मामलों में पूछताछ की जा सकती है।

जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश करेगी कि ट्रस्ट को मिली धनराशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए हुआ और क्या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। पूछताछ के बाद एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।

फिलहाल, जेल से बाहर आने के कुछ ही समय बाद ईडी की हिरासत में पहुंचना आजम खान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। एक तरफ उन्हें पुराने मामलों में जमानत और रिहाई की राहत मिली थी, वहीं दूसरी तरफ जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट से जुड़े 494 करोड़ रुपये के मामले ने उनकी मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं। अब सबकी नजरें ईडी की पूछताछ और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।