धनतेरस पर भोपाल की सफाई व्यवस्था चरमराई, मंत्रालय से न्यू मार्केट तक कचरे के ढेर; 13 हजार नगर निगम कर्मचारी हड़ताल पर, पेयजल आपूर्ति पर भी मंडराया संकट
भोपाल में नगर निगम के करीब 13 हजार कर्मचारी लगातार दूसरे दिन हड़ताल पर हैं। घरों से कचरा उठना बंद होने के बाद अब पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। कई इलाकों में नल नहीं खुले और टैंकरों से पानी का परिवहन बंद होने की जानकारी सामने आई है। कर्मचारी 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और अनुकंपा नियुक्ति समेत चार मांगों पर अड़े हैं।
भोपाल में सफाई कर्मचारियों की तीन दिन से जारी हड़ताल के कारण धनतेरस पर न्यू मार्केट, मंत्रालय और 4 इमली में कचरे के ढेर लगे हैं. कर्मचारी 25 हजार रुपये वेतन समेत कई मांगों पर अड़े हैं
भोपाल। दीपावली और धनतेरस के त्योहार पर जहां राजधानी भोपाल के बाजारों में खरीदारी को लेकर रौनक देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। सफाई कर्मचारियों के आंदोलन ने अब नगर निगम के कई अन्य विभागों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। इसका सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। शहर के कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठने के कारण सड़कों, गलियों और बाजारों में गंदगी के ढेर लगने लगे हैं। मंत्रालय से लेकर न्यू मार्केट तक सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति सामने आ रही है।
नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल लगातार व्यापक होती जा रही है। सफाई व्यवस्था के साथ अब पेयजल आपूर्ति पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। त्योहार के महत्वपूर्ण अवसर पर सफाई और पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं के बाधित होने से शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
13 हजार कर्मचारी आंदोलन में शामिल, 85 वार्डों में कामकाज प्रभावित
भोपाल नगर निगम के करीब 13 हजार कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इनमें लगभग सात हजार सफाई कर्मचारी और छह हजार अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। आंदोलन का दायरा केवल सफाई विभाग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नगर निगम के कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, जलप्रदाय, अग्निशमन, भवन अनुज्ञा, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ से जुड़े कर्मचारी भी काम बंद कर आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
इसका असर नगर निगम मुख्यालय अटल भवन से लेकर शहर के सभी 85 वार्डों और 21 जोन में दिखाई दे रहा है। कार्यालयों में नियमित कामकाज प्रभावित होने के साथ ही नागरिकों से जुड़े कई जरूरी कार्य भी अटक गए हैं। त्योहार के दौरान नगर निगम की सेवाओं में आई इस रुकावट ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
400 से ज्यादा कचरा वाहन खड़े, प्रतिदिन निकलता है 850 टन कचरा
हड़ताल का सबसे गंभीर असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। घर-घर से कचरा एकत्र करने के लिए नगर निगम की 400 से अधिक गाड़ियां गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में ये वाहन प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाकर अलग-अलग कॉलोनियों और मोहल्लों से कचरा उठाते हैं, लेकिन कर्मचारियों के काम बंद करने से यह व्यवस्था लगभग ठप हो गई है।
भोपाल में प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर एकत्र होने वाले कचरे को कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित कचरा निस्तारण केंद्र तक पहुंचाया जाता है। कलेक्शन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कचरे का निस्तारण भी बाधित हो रहा है।
लगातार दो दिनों से घरों से कचरा नहीं उठने के कारण कई कॉलोनियों में डस्टबिन भर चुके हैं। जगह-जगह कचरा सड़कों पर फैलने लगा है। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी गंदगी जमा होने लगी है। धनतेरस पर बाजारों में ग्राहकों की भीड़ और दुकानों की गतिविधियां बढ़ने के बीच सफाई व्यवस्था का बिगड़ना नगर निगम के लिए परेशानी का कारण बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो दीपावली के दौरान कचरे की समस्या और गंभीर हो सकती है।
2.30 लाख नल कनेक्शनों पर पानी का संकट, टैंकर व्यवस्था भी प्रभावित
सफाई व्यवस्था के बाद अब शहर की पेयजल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। नगर निगम के जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों के काम बंद करने से पानी वितरण की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। कुछ क्षेत्रों में नलों से पानी नहीं आने और टैंकरों के माध्यम से होने वाली आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है।
भोपाल में लगभग 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं। ऐसे में यदि जलप्रदाय विभाग के कर्मचारी लंबे समय तक आंदोलन पर रहे तो बड़ी आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर उन बस्तियों और कॉलोनियों में स्थिति गंभीर हो सकती है, जहां नियमित जलापूर्ति के साथ-साथ टैंकरों पर भी निर्भरता रहती है।
त्योहार के समय घरों में साफ-सफाई, पूजा-पाठ और अन्य तैयारियों के लिए पानी की जरूरत अधिक होती है। ऐसे में जलापूर्ति बाधित होने से आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल शहरवासियों की निगाहें नगर निगम प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हुई हैं।
10,500 रुपये वेतन से बढ़ाकर 25 हजार करने की मांग
कर्मचारियों के आंदोलन के पीछे वेतन वृद्धि, नियमितीकरण और अन्य लंबित मांगें प्रमुख हैं। अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग वर्तमान में मिल रहे 10,500 रुपये वेतन को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करना है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों का निराकरण करने, नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग भी उठाई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगें लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात होने के बाद ही हड़ताल को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा। कर्मचारियों की मांग है कि उनकी समस्याओं को केवल आश्वासन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन पर ठोस कार्रवाई की जाए।
नगर निगम आयुक्त के साथ बैठक पर टिकी समाधान की उम्मीद
हड़ताल खत्म कराने के लिए नगर निगम प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का प्रयास किया जा रहा है। शुक्रवार को नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के साथ कर्मचारी नेताओं की बैठक प्रस्तावित है। इससे पहले नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों और यूनियन पदाधिकारियों के बीच भी चर्चा हो चुकी है।
नगर निगम आयुक्त ने बातचीत को सकारात्मक और सार्थक बताते हुए हड़ताल समाप्त होने की उम्मीद जताई है। हालांकि कर्मचारी अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने और मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में शुक्रवार की बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले गुरुवार को कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान बिजली आपूर्ति बंद करने के साथ ही कार्यालय में ताला भी लगा दिया गया था। इससे नगर निगम के कामकाज पर आंदोलन के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
त्योहार के बीच आम जनता की बढ़ी परेशानी, समाधान का इंतजार
धनतेरस और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के बीच राजधानी की सफाई और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होना शहरवासियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। एक ओर लोग घरों और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कचरा नहीं उठने से कई इलाकों में गंदगी फैल रही है। पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई ठोस रास्ता निकलता है या नहीं। यदि जल्द सहमति नहीं बनी तो दीपावली के दौरान सफाई, कचरा परिवहन और पेयजल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं पर संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल भोपाल के नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन कर्मचारियों की जायज मांगों और शहर की आवश्यक सेवाओं के बीच संतुलन बनाकर जल्द समाधान निकालेगा, ताकि त्योहार के दौरान राजधानी की व्यवस्थाएं दोबारा पटरी पर लौट सकें।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस