राहुल गांधी की रैली से दूरी पड़ी भारी, मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारी निलंबित; 8 राज्यों में 215 नेताओं पर कार्रवाई, पारिवारिक मजबूरियों के बावजूद नहीं मिली राहत
नई दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली में हिस्सा नहीं लेने वाले कांग्रेस के तीन पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इसमें शहर और देहात यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अध्यक्ष के साथ ही बीकानेर से प्रदेश सचिव भी शामिल हैं। वहीं इस मामले में शहर व देहात कार्यकारिणी के नेता भी दिल्ली नहीं पहुंचे, जिन पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। पार्टी पदाधिकारी के सामने चुनाव लड़ने वाले दस बागी प्रत्याशियों के खिलाफ भी नहीं हुई।
शादी, परिवार में किसी की मौत, लंबे इंतजार के बाद बच्चे का जन्म और बुखार आना… ये कुछ ऐसी वजहें हैं जो मध्य प्रदेश के युवा कांग्रेस नेताओं ने बताई हैं। इन नेताओं को दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली में शामिल न होने के कारण सस्पेंड कर दिया गया है। इस रैली को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संबोधित किया था।
भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट चोरी विरोधी रैली' में शामिल नहीं होने पर आठ राज्यों के युवा कांग्रेस पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश के 60 पदाधिकारी भी शामिल हैं। रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने हिस्सा लिया था। युवा कांग्रेस नेतृत्व ने रैली से अनुपस्थित रहने को संगठनात्मक अनुशासनहीनता मानते हुए तीन नवंबर को निलंबन के आदेश जारी किए।
इस कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस में हलचल मच गई है। निलंबित पदाधिकारियों में प्रदेश उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव स्तर के नेता शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, कुछ निलंबित नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी अनुपस्थिति के पीछे पारिवारिक और व्यक्तिगत मजबूरियां थीं। उनका आरोप है कि संगठन ने निलंबन से पहले उनका पक्ष सुनने की जरूरत नहीं समझी।
आठ राज्यों में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों पर कार्रवाई
भारतीय युवा कांग्रेस की ओर से जारी कार्रवाई में कई राज्यों के पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 60 पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। इसके अलावा गुजरात, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी नेताओं को निलंबित किया गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में 49, पश्चिम बंगाल में 26, उत्तर प्रदेश मध्य में 11, तेलंगाना में 14, हरियाणा में 10, मध्य प्रदेश में 60 और झारखंड में 32 पदाधिकारियों के निलंबन की जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों का कुल योग 202 होता है, जबकि शुरुआती जानकारी में 215 पदाधिकारियों पर कार्रवाई का दावा किया गया है। ऐसे में कुल संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
एक नवंबर को दिल्ली में हुई थी वोट चोरी विरोधी रैली
दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन की ओर से 'वोट चोरी विरोधी रैली' आयोजित की गई थी। इस रैली में राहुल गांधी ने भी संबोधित किया था। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने इस कार्यक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा बताया था। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने रैली से पहले ही राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के सभी पदाधिकारियों को इसमें शामिल होने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई पदाधिकारी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
मोबाइल ऐप और बारकोड से दर्ज की जा रही थी उपस्थिति
रैली में पदाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए युवा कांग्रेस नेतृत्व ने तकनीक का भी इस्तेमाल किया था। कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक, मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पदाधिकारियों को रैली की लोकेशन, समय और अन्य जरूरी जानकारियां भेजी गई थीं।
इसके अलावा दिल्ली के मिंटो रोड स्थित असेंबली पॉइंट पर बारकोड स्कैनर की व्यवस्था भी की गई थी। इसके जरिए रैली में पहुंचने वाले पदाधिकारियों की उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। संगठन के एक अन्य नेता ने बताया कि सभी राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों को रैली के साथ उससे पहले आयोजित मार्च में भी शामिल होने के निर्देश दिए गए थे।
जिन पदाधिकारियों ने मोबाइल एप्लिकेशन पर रजिस्ट्रेशन नहीं किया और निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। संगठन ने इसे सामान्य अनुपस्थिति के बजाय अनुशासनहीनता का मामला माना।
मैहर जिला अध्यक्ष बोले- भाई के घर 12 साल बाद बेटे का जन्म हुआ
निलंबन की कार्रवाई से नाराज कुछ नेताओं ने अपनी मजबूरियां भी सामने रखी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, युवा कांग्रेस के मैहर जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने बताया कि उनके बड़े भाई के घर 12 साल बाद बेटे का जन्म हुआ था। परिवार में लंबे इंतजार के बाद आई इस खुशी के मौके पर वह मौजूद रहना चाहते थे। इसी वजह से वह दिल्ली की रैली में शामिल नहीं हो सके।
सौरभ शर्मा का कहना है कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के अन्य पदाधिकारियों को अपनी पारिवारिक स्थिति के बारे में पहले ही जानकारी दे दी थी। उन्होंने परिवार में आयोजित कार्यक्रम का निमंत्रण भी संगठन के लोगों को दिया था। इसके बावजूद उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।
उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से युवा कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और संगठन के कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय भागीदारी करते रहे हैं। कई वर्षों से संगठन के लिए काम करने के बावजूद इस तरह की कार्रवाई से उन्हें निराशा हुई है।
सौरभ शर्मा ने निलंबन के फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है। उनका कहना है कि जिन पदाधिकारियों के पास रैली में नहीं पहुंचने का कोई उचित कारण नहीं था, उनके खिलाफ संगठन कार्रवाई कर सकता है। लेकिन जिनकी वास्तविक पारिवारिक मजबूरियां थीं, उनका पक्ष सुने बिना निलंबित करना उचित नहीं है।
चाचा के निधन के कारण नहीं पहुंच सके महासचिव रोहित राजौरिया
युवा कांग्रेस के महासचिव रोहित राजौरिया ने भी अपनी अनुपस्थिति की वजह पारिवारिक दुख बताया है। उन्होंने कहा कि उनके चाचा का निधन हो गया था, जिसके कारण वह दिल्ली में आयोजित रैली में शामिल नहीं हो सके।
रोहित राजौरिया के मुताबिक, उन्होंने अपने चाचा के निधन की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष और युवा कांग्रेस के रमाशंकर को दे दी थी। उन्होंने रैली में शामिल नहीं हो पाने के लिए पहले ही अनुमति भी मांगी थी। इसके बावजूद उनका नाम निलंबित पदाधिकारियों की सूची में शामिल कर लिया गया।
उनका मानना है कि संगठन को कार्रवाई करने से पहले संबंधित पदाधिकारियों की परिस्थितियों को समझना चाहिए था। पारिवारिक शोक और जरूरी जिम्मेदारियों के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाना जानबूझकर की गई अनुशासनहीनता नहीं माना जाना चाहिए।
निलंबन से पहले नोटिस देने की उठाई मांग
कार्रवाई के बाद निलंबित पदाधिकारियों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि संगठन में अनुशासन जरूरी है और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन भी होना चाहिए, लेकिन किसी पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसका पक्ष सुनना भी उतना ही जरूरी है।
उनका कहना है कि यदि कोई नेता बिना उचित कारण के संगठन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम से दूरी बनाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जिन लोगों ने पहले ही अपनी पारिवारिक या व्यक्तिगत मजबूरियों की जानकारी दे दी थी, उनके मामलों पर अलग से विचार किया जाना चाहिए था।
निलंबित नेताओं ने मांग की है कि संगठन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब लेने के बाद ही अंतिम फैसला करना चाहिए था।
तीन नवंबर को जारी हुए निलंबन आदेश
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई है। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित वोट चोरी विरोधी रैली से अनुपस्थित रहने के कारण संगठनात्मक अनुशासनहीनता का मामला सामने आया था।
इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक निलंबित किया गया है। निलंबन के आदेश तीन नवंबर को जारी किए गए थे।
संगठन के मुताबिक, यह कदम अनुशासन बनाए रखने और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ अन्य राज्यों के पदाधिकारियों के खिलाफ भी आगे कार्रवाई हो सकती है।
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस में बढ़ सकती है हलचल
मध्य प्रदेश में 60 पदाधिकारियों के निलंबन के बाद युवा कांग्रेस के भीतर इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर संगठन राष्ट्रीय कार्यक्रमों में पदाधिकारियों की अनिवार्य भागीदारी और अनुशासन को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं दूसरी ओर निलंबित नेता अपनी व्यक्तिगत मजबूरियों को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगा रहे हैं।
अब देखना होगा कि निलंबित पदाधिकारियों की अपील पर संगठन क्या निर्णय लेता है और क्या उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। फिलहाल निलंबन के आदेश आगामी आदेश तक प्रभावी रहेंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस