ई-अटेंडेंस ऐप ने दिया शिक्षकों को झटका, प्रदेशभर में नहीं लग पाई हाजिरी; सुबह और फुल-डे शिफ्ट के विकल्प गायब होने से मचा हड़कंप
गुरुवार को प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगा पाए। स्कूल शिक्षा विभाग के 'हमारे शिक्षक' ऐप में तकनीकी दिक्कत के कारण यह परेशानी आई। ऐप में सुबह की पाली और पूरे दिन की पाली का विकल्प दिखाई नहीं दे रहा था। साथ ही लॉगिन समय में अचानक बदलाव होने से सुबह और पूरे दिन की पाली में काम करने वाले शिक्षक अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाए। कई शिक्षक निर्धारित समय पर अटेंडेंस लगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन ऐप में जरूरी विकल्प उपलब्ध नहीं थे।
ऐप से अचानक गायब हुए मॉर्निंग और फुल-डे शिफ्ट के विकल्प
केवल दोपहर, ऑन ड्यूटी और नाइट शिफ्ट के ऑप्शन आए नजर
लॉगिन टाइमिंग में बदलाव से शिक्षकों के सामने खड़ा हुआ संकट
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) व्यवस्था बुधवार को तकनीकी गड़बड़ी के चलते बुरी तरह प्रभावित हो गई। राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक समय पर अपनी ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं कर पाए। सुबह स्कूल पहुंचने के बाद जब शिक्षकों ने मोबाइल ऐप के माध्यम से उपस्थिति लगाने का प्रयास किया, तो उन्हें ऐप में जरूरी विकल्प ही दिखाई नहीं दिए। अचानक हुए इस बदलाव ने शिक्षकों के सामने नई परेशानी खड़ी कर दी। सबसे बड़ी दिक्कत यह रही कि ऐप से सुबह की पाली (Morning Shift) और पूरे दिन की पाली (Full Day) के विकल्प गायब हो गए थे।
इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक असमंजस में पड़ गए। स्कूल पहुंचने के बावजूद वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि जब ऐप में उनकी शिफ्ट से संबंधित विकल्प ही उपलब्ध नहीं हैं, तो वे अपनी हाजिरी किस माध्यम से दर्ज करें। वहीं, लॉगिन टाइमिंग में बदलाव ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया।
ऐप में अचानक गायब हुए सुबह और फुल-डे शिफ्ट के विकल्प
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह शिक्षक नियमित रूप से अपनी ई-अटेंडेंस दर्ज करने के लिए मोबाइल ऐप पर लॉगिन कर रहे थे। इस दौरान उन्हें ऐप के इंटरफेस में बदलाव नजर आया। शिक्षकों के अनुसार, पहले उपस्थिति दर्ज करने के लिए उपलब्ध रहने वाले मॉर्निंग शिफ्ट और फुल-डे शिफ्ट के विकल्प अचानक दिखाई देना बंद हो गए।
ऐप में उस समय केवल दोपहर (Afternoon), ऑन ड्यूटी (On Duty-OD) और रात्रि (Night) के विकल्प ही प्रदर्शित हो रहे थे। सुबह स्कूल पहुंचने वाले शिक्षकों के लिए मॉर्निंग शिफ्ट का विकल्प जरूरी था, जबकि पूरे दिन स्कूल में कार्य करने वाले शिक्षकों को फुल-डे शिफ्ट के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी थी। लेकिन दोनों विकल्प गायब होने से शिक्षक चाहकर भी अपनी हाजिरी नहीं लगा सके।
शिक्षकों ने कई बार ऐप को खोलकर और लॉगिन प्रक्रिया दोहराकर उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुछ शिक्षकों को समझ नहीं आया कि यह बदलाव तकनीकी अपडेट के कारण हुआ है या ऐप में किसी तरह की गड़बड़ी आ गई है।
लॉगिन टाइमिंग में बदलाव से बढ़ा असमंजस
ई-अटेंडेंस ऐप में विकल्प गायब होने के साथ ही लॉगिन टाइमिंग में बदलाव की समस्या भी सामने आई। शिक्षकों के मुताबिक, उपस्थिति दर्ज करने की समय व्यवस्था में अचानक फेरबदल होने से पहले से ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में जब ऐप पर जरूरी शिफ्ट के विकल्प भी उपलब्ध नहीं मिले, तो स्थिति और उलझ गई।
सुबह निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचने वाले शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए मोबाइल लेकर ऐप पर लॉगिन करते रहे। लेकिन ऐप में उपलब्ध विकल्प उनकी वास्तविक ड्यूटी के अनुरूप नहीं थे। दोपहर और रात्रि के विकल्प दिखाई देने के कारण सुबह की पाली में कार्यरत शिक्षकों के लिए सही विकल्प चुनना संभव नहीं हो पा रहा था।
शिक्षकों का कहना था कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले उसकी जानकारी देना जरूरी है। यदि ऐप में तकनीकी अपडेट किया जा रहा है, तो संबंधित शिक्षकों को इसकी सूचना पहले मिलनी चाहिए, ताकि वे नई व्यवस्था के अनुसार अपनी हाजिरी दर्ज कर सकें।
समय पर हाजिरी नहीं लगने से अनुपस्थिति का डर
इस तकनीकी गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर बनी चिंता के रूप में सामने आया। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जा रही है। ऐसे में ऐप में तकनीकी समस्या आने पर शिक्षक इस बात को लेकर परेशान हो गए कि कहीं उनकी हाजिरी दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें अनुपस्थित न मान लिया जाए।
शिक्षकों के सामने स्थिति यह थी कि वे अपने कार्यस्थल पर मौजूद थे, लेकिन तकनीकी कारणों से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। यदि ऐप में उपस्थिति दर्ज नहीं होती है, तो बाद में उसका रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए भी उन्हें संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
इसी आशंका के चलते शिक्षकों ने तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी सहायता टीम को समस्या से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ऐप में सुबह और पूरे दिन की शिफ्ट के विकल्प उपलब्ध नहीं होने से उपस्थिति दर्ज करने में परेशानी हो रही है।
प्रदेशभर के शिक्षकों को करना पड़ा परेशानी का सामना
यह समस्या केवल किसी एक स्कूल या जिले तक सीमित नहीं बताई जा रही है। भोपाल सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस ऐप में इसी तरह की परेशानी सामने आने की जानकारी दी। प्रदेशभर में एक साथ इस तरह की समस्या सामने आने से ऐप की तकनीकी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षकों का मानना है कि जब ऑनलाइन उपस्थिति पूरे प्रदेश में लागू है, तो इसकी तकनीकी व्यवस्था भी ऐसी होनी चाहिए कि किसी एक अपडेट या सर्वर संबंधी समस्या के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित न हों। विशेष रूप से सुबह स्कूल पहुंचने के समय ऐप का सही तरीके से काम करना जरूरी है, क्योंकि इसी समय अधिकांश शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करते हैं।
शिक्षकों ने यह भी चिंता जताई कि तकनीकी समस्या का खामियाजा उन कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए, जो निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐप में विकल्प उपलब्ध नहीं होना शिक्षकों के नियंत्रण से बाहर की समस्या है।
तकनीकी टीम से समाधान की उम्मीद
ई-अटेंडेंस ऐप में आई इस गड़बड़ी के बाद शिक्षा विभाग की तकनीकी व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत महसूस की जा रही है। संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा ऐप को सामान्य बनाने और उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को सुचारु करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षकों की मांग है कि ऐप में सुबह की पाली और पूरे दिन की पाली के विकल्प जल्द बहाल किए जाएं। इसके साथ ही लॉगिन टाइमिंग में हुए बदलाव को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शिक्षकों को यह पता रहे कि उन्हें किस समय और किस विकल्प के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी है।
शिक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, लेकिन जब तकनीकी व्यवस्था ही बाधा बन जाए तो इसका समाधान निकालना विभाग की जिम्मेदारी है। तकनीकी खराबी के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाने वाले शिक्षकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए।
शिक्षकों की मांग- तकनीकी खामी का न बने अनुपस्थिति का आधार
प्रदेशभर में सामने आई इस समस्या के बाद शिक्षकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि तकनीकी गड़बड़ी के दौरान स्कूल में मौजूद रहने के बावजूद ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं हो पाने की स्थिति में उनके उपस्थिति रिकॉर्ड का क्या होगा। शिक्षकों की मांग है कि ऐसी परिस्थितियों में स्कूल में उनकी वास्तविक उपस्थिति को मान्य किया जाए और किसी भी शिक्षक को ऐप की तकनीकी खराबी के कारण अनुपस्थित नहीं माना जाए।
इसके लिए विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी और कार्रवाई की आशंका से राहत मिल सके। साथ ही ऐप में बदलाव करने से पहले उसका तकनीकी परीक्षण किया जाए और शिक्षकों को इसकी जानकारी दी जाए।
फिलहाल ई-अटेंडेंस ऐप में सुबह और फुल-डे शिफ्ट के विकल्प गायब होने से प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों के शिक्षक परेशान हैं। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की तकनीकी टीम पर है कि ऐप की व्यवस्था कितनी जल्दी सामान्य होती है और प्रभावित शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर क्या समाधान निकाला जाता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस