महाकाल मंदिर में रविंद्र पुरी महाराज को दर्शन के लिए रोका, मोबाइल चेकिंग पर भड़के अखाड़ा परिषद अध्यक्ष; बोले- CM मोहन यादव से करूंगा शिकायत

उज्जैन के महाकाल मंदिर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महामंडलेश्वर रविंद्र पुरी महाराज ने सुरक्षा कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रोटोकॉल होने के बावजूद मोबाइल चेकिंग के नाम पर उन्हें रोका गया और चांदी गेट से प्रवेश देने में देरी की गई। घटना से नाराज महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और दिल्ली में शिकायत करने की बात कही है। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई और मंदिर की दर्शन व्यवस्था में सुधार की मांग की। वहीं, विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी ने भी मंदिर प्रशासक से फोन पर नाराजगी जताई।

महाकाल मंदिर में रविंद्र पुरी महाराज को दर्शन के लिए रोका, मोबाइल चेकिंग पर भड़के अखाड़ा परिषद अध्यक्ष; बोले- CM मोहन यादव से करूंगा शिकायत

 महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर संतों ने उठाए सवाल, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज को प्रवेश के लिए करना पड़ा इंतजार; नाराज होकर बोले- मुख्यमंत्री तक पहुंचाऊंगा मामला

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी में मंदिर की दर्शन व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महामंडलेश्वर रविंद्र पुरी महाराज ने मंदिर के सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रोटोकॉल निर्धारित होने के बावजूद उन्हें मंदिर में प्रवेश के लिए परेशान होना पड़ा। मोबाइल की जांच के नाम पर उन्हें रोका गया और चांदी गेट से प्रवेश देने में भी टालमटोल की गई। इस घटनाक्रम से नाराज रविंद्र पुरी महाराज ने साफ कर दिया कि वे इस मामले को चुपचाप नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर दिल्ली तक शिकायत पहुंचाने की बात कही है।

दर्शन करने पहुंचे तो सुरक्षा जांच में उलझा मामला

नासिक कुंभ मेले का ध्वज फहराने के बाद बुधवार को उज्जैन पहुंचे रविंद्र पुरी महाराज गुरुवार दोपहर करीब 4 बजे बाबा महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुंचे थे। उनके लिए पहले से ही प्रोटोकॉल के तहत चांदी गेट से प्रवेश और देहरी से दर्शन की व्यवस्था तय थी।

लेकिन मंदिर पहुंचने के बाद मामला उस समय बिगड़ गया, जब सुरक्षा कर्मचारियों ने मोबाइल चेकिंग के नाम पर उन्हें रोक लिया। प्रवेश को लेकर काफी देर तक असमंजस बना रहा। साथ आए अनुयायियों ने भी कर्मचारियों को निर्धारित व्यवस्था की जानकारी दी, लेकिन इसके बावजूद तत्काल रास्ता नहीं दिया गया।

 संतों को ही परेशानी तो श्रद्धालुओं की सुनवाई कौन करेगा?

इस व्यवहार से आहत रविंद्र पुरी महाराज ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर तीखी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि जब संतों और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के साथ ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो दूर-दराज से आने वाले सामान्य श्रद्धालुओं को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में कुछ कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। उन्होंने संबंधित कर्मचारी की पहचान अधिकारियों को बताते हुए उसे तत्काल हटाने की मांग की।

मुख्यमंत्री और दिल्ली तक पहुंचेगा मामला

रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि वे इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से करेंगे। इसके अलावा दिल्ली में भी संबंधित स्तर पर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने व्यवस्था को कमाई का जरिया बना लिया है।

उनका कहना है कि मंदिर जैसे आस्था के बड़े केंद्र में आने वाले संतों का सम्मान होना चाहिए। कर्मचारियों को नियमों के नाम पर मनमानी करने की छूट नहीं मिलनी चाहिए।

कुंभ की तैयारियों के बीच महाकाल मंदिर पर उठे सवाल

आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर देशभर से साधु-संतों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने वाली है। ऐसे में महाकाल मंदिर में प्रवेश और दर्शन की व्यवस्था को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिए चुनौती बन सकते हैं।

रविंद्र पुरी महाराज ने आशंका जताई कि यदि कर्मचारियों का रवैया इसी तरह रहा तो आने वाले समय में विवाद बढ़ सकते हैं। इससे मंदिर की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ सकता है।

प्रोटोकॉल था, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं पहुंचे?

इस पूरे घटनाक्रम में मंदिर प्रशासन की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बन गई है। जब अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के लिए प्रोटोकॉल के तहत दर्शन की व्यवस्था थी, तब मौके पर प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद क्यों नहीं था?

मंदिर में प्रशासक, डिप्टी कलेक्टर और जनसंपर्क से जुड़े अधिकारी तैनात हैं। इसके बावजूद प्रवेश के दौरान उत्पन्न स्थिति को संभालने के लिए किसी अधिकारी का मौके पर नहीं पहुंचना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

 रवि सोलंकी ने भी जताई नाराजगी

घटना के दौरान विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी मंदिर परिसर में मौजूद थे। जानकारी मिलने पर वे रविंद्र पुरी महाराज से मिलने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने मंदिर प्रशासक को फोन कर व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

अब मंदिर प्रशासन के जवाब पर टिकी नजरें

महाकाल मंदिर में सुरक्षा जांच और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन व्यवस्था के नाम पर किसी को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के आरोपों के बाद अब सवाल यह है कि मंदिर प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और संबंधित कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं। मुख्यमंत्री से शिकायत की घोषणा के बाद यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।