विधायक के सरकारी आवास में पुलिस की वर्दी पहने युवक-युवती मिलने से मचा हड़कंप, कांग्रेस विधायक ने की शिकायत; विधानसभा सचिवालय ने मांगी जांच रिपोर्ट

भोपाल विधायक विश्राम गृह में कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बॉस के आवंटित कमरों में पुलिस वर्दी पहने आपत्तिजनक हालत में युवक-युवती मिले। अचानक पहुंचे विधायक देखकर हो गए हैरान।

विधायक के सरकारी आवास में पुलिस की वर्दी पहने युवक-युवती मिलने से मचा हड़कंप, कांग्रेस विधायक ने की शिकायत; विधानसभा सचिवालय ने मांगी जांच रिपोर्ट

विधायक विश्राम गृह स्थित कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बोस के सरकारी आवास में आपत्तिजनक स्थिति में मिले युवक-युवती की पहचान की जा रही है। विधायक का आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी थे। उनके पहुंचने पर एक ने वर्दी पहन ली थी, जबकि दूसरे ने उनके सामने ही वर्दी पहनी 

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित विधायक विश्राम गृह में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन 'बॉस' को आवंटित सरकारी आवास के कमरों में पुलिस की वर्दी पहने एक युवक और युवती के मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि दोनों विधायक के निजी आवंटित कमरों में मौजूद थे। इसी दौरान विधायक अचानक दिल्ली से लौटकर अपने आवास पहुंचे और जैसे ही उन्होंने कमरों का दरवाजा खोला, अंदर का नजारा देखकर हैरान रह गए।

विधायक के अचानक पहुंचने पर युवक और युवती घबरा गए। दोनों ने कथित तौर पर हाथ जोड़कर माफी मांगनी शुरू कर दी। हालांकि, कुछ ही देर में मौका पाकर दोनों वहां से निकल गए। घटना के बाद विधायक ने विश्राम गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए विधानसभा सचिवालय को लिखित शिकायत दी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा सचिवालय के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर पुलिस की वर्दी पहने युवक और युवती विधायक के आवंटित कमरों तक कैसे पहुंचे और उन्हें कमरों की चाबी किसने उपलब्ध कराई।

दिल्ली से लौटते ही अपने कमरों में पहुंचे विधायक

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 2 नवंबर की दोपहर करीब 3 बजे का बताया जा रहा है। महिदपुर से कांग्रेस विधायक दिनेश जैन 'बॉस' दिल्ली से भोपाल लौटे थे। इसके बाद वे विधायक विश्राम गृह के खंड क्रमांक-3 में स्थित अपने आवंटित कमरों में पहुंचे। विधायक को यहां कक्ष क्रमांक 13 और 14 आवंटित किए गए हैं।

विधायक जब अपने कमरों में पहुंचे तो उन्होंने दरवाजा खोला। अंदर पुलिस की वर्दी पहने एक युवक और युवती मौजूद थे। दोनों को इस तरह कमरे में देखकर विधायक कुछ देर के लिए हैरान रह गए। सरकारी आवास में उनकी अनुपस्थिति के दौरान अनजान लोगों का मौजूद होना अपने आप में गंभीर मामला था।

विधायक के अचानक पहुंचने से दोनों घबरा गए और उन्हें देखकर माफी मांगने लगे। बताया जा रहा है कि दोनों ने हाथ-पैर जोड़कर वहां से निकलने की कोशिश की। इसी बीच मौका मिलते ही वे कमरे से बाहर निकलकर भाग गए। हालांकि, दोनों की पहचान और उनके वहां पहुंचने के पीछे की वास्तविक वजह अभी जांच का विषय है।

माफी मांगते रहे युवक-युवती, मौका मिलते ही निकल गए बाहर

घटना के दौरान सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि विधायक के आवंटित कमरों में मौजूद युवक और युवती दोनों पुलिस की वर्दी पहने हुए थे। विधायक के सामने आने के बाद दोनों ने कथित तौर पर माफी मांगी, लेकिन इसके बावजूद वे वहां से निकल गए।

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि दोनों अधिकृत पुलिसकर्मी थे तो उन्हें विधायक के निजी आवंटित कमरों में जाने की अनुमति किसने दी थी? यदि वे अधिकृत नहीं थे तो पुलिस की वर्दी पहनकर सरकारी विश्राम गृह के सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में प्रवेश कैसे कर गए? क्या विश्राम गृह के कर्मचारियों को उनके आने की जानकारी थी या फिर वे बिना किसी रोक-टोक के अंदर पहुंच गए?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे। किसी भी व्यक्ति की पहचान और उसके पद को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

केयरटेकर के पास जमा रहती हैं कमरों की चाबियां

कांग्रेस विधायक दिनेश जैन ने अपनी शिकायत में कमरों की चाबी रखने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वे भोपाल से बाहर रहते हैं, तब उनके आवंटित कमरों की चाबियां विश्राम गृह के मुख्य काउंटर पर केयरटेकर के पास जमा रहती हैं।

विधायक के अनुसार, कमरों की साफ-सफाई और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए वहां तैनात कर्मचारियों को कमरों तक पहुंच दी जाती है। इसके लिए चाबियां कर्मचारियों के पास उपलब्ध रहती हैं। लेकिन इस व्यवस्था में सुरक्षा की पर्याप्त निगरानी नहीं होने पर इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

विधायक ने आशंका जताई है कि यदि कमरों की चाबियों के रखरखाव और उनके इस्तेमाल की उचित निगरानी नहीं की गई तो कोई भी बाहरी व्यक्ति इसका फायदा उठा सकता है। ऐसे में अनधिकृत व्यक्ति सरकारी आवास में प्रवेश कर सकते हैं। यह स्थिति केवल किसी एक विधायक के आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विश्राम गृह की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

विधानसभा सचिवालय के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने शुरू की जांच

विधायक दिनेश जैन की लिखित शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लिया है। सचिवालय के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जांच में मुख्य रूप से इस बात का पता लगाया जाएगा कि 2 नवंबर को विधायक के आवंटित कक्ष क्रमांक 13 और 14 में युवक-युवती किस रास्ते से पहुंचे थे। उन्हें कमरों की चाबी किसने दी और क्या इसके लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की अनुमति ली गई थी।

इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि कमरों की चाबी जमा करने और जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर खंगाल रहा विभाग

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार, मामले की तह तक पहुंचने के लिए विधायक विश्राम गृह परिसर और खंड क्रमांक-3 में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है।

सीसीटीवी फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि युवक और युवती विश्राम गृह में कब दाखिल हुए, वे किस रास्ते से विधायक के कमरों तक पहुंचे और घटना के बाद किस दिशा में बाहर निकले। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति तो मौजूद नहीं था।

जांच के दायरे में विश्राम गृह का ड्यूटी रजिस्टर भी शामिल किया गया है। 2 नवंबर को मुख्य काउंटर पर किस कर्मचारी की ड्यूटी थी, कमरों की चाबी किसके पास थी और क्या किसी बाहरी व्यक्ति को चाबी दी गई थी, इन सभी बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है।

जांच अधिकारियों के लिए सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। इनके आधार पर घटना के समय मौजूद कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है।

विधायक विश्राम गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल स्थित विधायक विश्राम गृह में प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को सरकारी कामकाज और राजधानी में प्रवास के दौरान रहने के लिए कमरे आवंटित किए जाते हैं। ऐसे परिसर में सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

विधायक दिनेश जैन के कमरों में अनधिकृत रूप से युवक-युवती के पहुंचने का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यदि कमरों की चाबियां कर्मचारियों के पास रहती हैं तो उनका रिकॉर्ड रखना और उनके इस्तेमाल की निगरानी करना भी जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की वर्दी पहने युवक और युवती आखिर किस आधार पर विधायक के आवंटित कमरों में पहुंचे थे? क्या उन्हें किसी कर्मचारी ने कमरे की चाबी दी थी या फिर उन्होंने किसी अन्य तरीके से प्रवेश किया? क्या विश्राम गृह के सुरक्षा कर्मचारियों ने उनकी गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया?

जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल इस पूरे मामले में जांच जारी है। विधानसभा सचिवालय के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर और चाबी वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक और युवती विधायक के कमरों तक कैसे पहुंचे और इस मामले में किसकी लापरवाही रही।

इस घटना ने विधायक विश्राम गृह में सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से परखने की जरूरत पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदार पाए जाने वाले कर्मचारियों या अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।