महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक को हटाने की मांग, रवींद्र पुरी महाराज ने अमित शाह को लिखा पत्र: संतों से अभद्रता पर जताई नाराजगी; बोले- विवाद हुआ तो मंदिर में मचेगा कोहराम

महाकाल मंदिर में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है। रवींद्र पुरी ने मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को हटाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त को पत्र लिखा है।

महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक को हटाने की मांग, रवींद्र पुरी महाराज ने अमित शाह को लिखा पत्र: संतों से अभद्रता पर जताई नाराजगी; बोले- विवाद हुआ तो मंदिर में मचेगा कोहराम

महाकाल मंदिर के प्रशासक को हटाने की मांग, रवींद्र पुरी महाराज ने अमित शाह को लिखा पत्र

 संतों से अभद्रता पर भड़के अखाड़ा परिषद अध्यक्ष, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक पर उठाए सवाल

जल द्वार पर चेकिंग के दौरान हुआ विवाद, सुरक्षाकर्मी की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं रवींद्र पुरी महाराज

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज के साथ मंदिर परिसर में कथित अभद्र व्यवहार का मामला अब केंद्रीय स्तर तक पहुंच गया है। मंदिर में चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों द्वारा कथित तौर पर की गई अभद्रता और शिकायत के बाद भी संबंधित कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई नहीं होने से नाराज रवींद्र पुरी महाराज ने मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को पद से हटाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को पत्र लिखा है।

रवींद्र पुरी महाराज ने अपने पत्र में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मंदिर प्रशासक के अधीनस्थ कर्मचारी साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान प्रशासक को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर ऐसे अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जिसे धार्मिक परंपराओं, संत समाज की मर्यादा और मंदिर की व्यवस्थाओं की बेहतर समझ हो।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियां चल रही हैं। सिंहस्थ में देशभर से लाखों साधु-संतों, अखाड़ों और करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था और संत समाज के साथ प्रशासनिक व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

 जल द्वार पर चेकिंग के दौरान हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, गुरुवार 5 नवंबर 2026 को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। इस दौरान जल द्वार के पास चेकिंग व्यवस्था को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की और उन्हें अनावश्यक रूप से रोक-टोक का सामना करना पड़ा।

रवींद्र पुरी महाराज का कहना है कि मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचने पर उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं दिया गया। प्रोटोकॉल के तहत जिन सहायक प्रशासक की ड्यूटी लगाई गई थी, वे भी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद मंदिर कर्मचारियों ने उन्हें यह कहते हुए रोका कि प्रशासक के सख्त निर्देश हैं कि कोई भी साधु-संत बिना चेकिंग के दर्शन नहीं कर सकता।

इस दौरान दर्शन व्यवस्था को लेकर काफी देर तक असहज स्थिति बनी रही। रवींद्र पुरी महाराज ने इसे केवल व्यक्तिगत अपमान का मामला नहीं, बल्कि संत समाज की गरिमा और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा विषय बताया है।

शिकायत के बाद निरीक्षक की ड्यूटी बदली, लेकिन कार्रवाई से संतुष्ट नहीं

घटना के बाद रवींद्र पुरी महाराज ने नाराजगी जाहिर करते हुए मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्र सरकार तक पहुंचाने की बात कही थी। विवाद सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने जल द्वार पर तैनात निरीक्षक जगदीश गोड को वहां की ड्यूटी से हटा दिया। उनकी जगह निरीक्षक राजू मालवीय को जिम्मेदारी सौंपी गई।

हालांकि, इस कार्रवाई से रवींद्र पुरी महाराज संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि केवल ड्यूटी बदल देना पर्याप्त नहीं है। जिस कर्मचारी पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी।

उनका आरोप है कि मंदिर प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। संबंधित कर्मचारी पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने अब सीधे मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को हटाने की मांग उठाई है।

अमित शाह और संभागायुक्त को भेजे पत्र में लगाए गंभीर आरोप

रवींद्र पुरी महाराज ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी। पत्र में उन्होंने मंदिर प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासक प्रथम कौशिक के अधीनस्थ कर्मचारियों के माध्यम से साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कराया जा रहा है।

उन्होंने लिखा कि पिछले लंबे समय से उन्हें इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि महाकाल मंदिर में साधु-संतों को सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिल रहा है। इसी क्रम में 5 नवंबर को जब वे स्वयं भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचे, तब उन्हें भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा।

पत्र में उन्होंने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित सहायक प्रशासक समय पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रशासक के सख्त आदेशों का हवाला देते हुए उन्हें चेकिंग के लिए रोका। इस घटनाक्रम से दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई और उन्हें अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ी।

रवींद्र पुरी महाराज ने पत्र में स्पष्ट किया कि मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर साधु-संतों के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं है। मंदिर प्रशासन को धार्मिक परंपराओं और संत समाज की प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए।

सिंहस्थ-2028 से पहले मंदिर प्रशासन पर उठाए सवाल

महंत रवींद्र पुरी महाराज ने अपने पत्र में सिंहस्थ-2028 का भी विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और संत समाज की आस्था से जुड़ा विश्वस्तरीय आयोजन है।

इसमें देश के विभिन्न अखाड़ों के महामंडलेश्वर, महंत, नागा साधु, संन्यासी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऐसे में यदि मंदिर प्रशासन का साधु-संतों के प्रति यही रवैया रहा तो भविष्य में गंभीर विवाद की स्थिति बन सकती है।

उन्होंने आशंका जताई कि सिंहस्थ के दौरान मंदिर में आने वाले संतों के साथ यदि इसी तरह का व्यवहार हुआ तो इससे सनातन धर्म की प्रतिष्ठा और धार्मिक भावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने मांग की है कि मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को तत्काल पद से हटाया जाए और उनकी जगह धार्मिक परंपराओं की जानकारी रखने वाले अनुभवी, संवेदनशील और संत समाज के प्रति सम्मान का भाव रखने वाले अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए।

दिल्ली रवाना हुए रवींद्र पुरी महाराज, आगे भी शिकायत की तैयारी

मामले को लेकर शुक्रवार शाम रवींद्र पुरी महाराज दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि वे वहां भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे। इससे स्पष्ट है कि वे इस मामले को केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित रखने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि उच्च स्तर पर कार्रवाई चाहते हैं।

उनके इस कदम के बाद महाकाल मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विवाद और बढ़ने की संभावना है। अब इस मामले में मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

 रवींद्र पुरी महाराज की चेतावनी- विवाद हुआ तो मंदिर में मचेगा कोहराम

पत्र लिखने के बाद रवींद्र पुरी महाराज ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि मंदिर में उनके साथ अभद्रता की गई। उन्होंने प्रशासन से मांग की थी कि ऐसे कर्मचारी को मंदिर से हटाया जाए, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। देशभर से साधु-संत और संन्यासी भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचेंगे। यदि मंदिर प्रशासन का व्यवहार इसी तरह रहा तो स्थिति बिगड़ सकती है।

रवींद्र पुरी महाराज ने कहा, "हमने प्रशासक से कहा था कि आगे कोई विवाद न हो। इसी वजह से हमने पत्र लिखा है। अगर कोई विवाद हुआ तो मंदिर में कोहराम मच जाएगा। हमारे साथ हुए अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजरें

महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर उठा यह विवाद अब संत समाज और मंदिर प्रशासन के बीच गंभीर मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर रवींद्र पुरी महाराज ने प्रशासक को हटाने की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री तक अपनी बात पहुंचाई है, वहीं दूसरी ओर संबंधित निरीक्षक की ड्यूटी बदले जाने के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ है।

सिंहस्थ-2028 से पहले इस घटनाक्रम ने मंदिर प्रशासन की तैयारियों, प्रोटोकॉल व्यवस्था और संतों के सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि मंदिर समिति और राज्य सरकार इस मामले में क्या निर्णय लेती हैं और संत समाज की नाराजगी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।