दृष्टिहीन बच्चियों की सुरीली गायकी पर झूमे कैलाश विजयवर्गीय, बोले- ये हमें पटक-पटक मारेंगी: आस्था वृद्धाश्रम में बुजुर्गों और बच्चों के साथ मनाई दिवाली, अंताक्षरी में मंत्री की टीम हारी

इंदौर के परदेशीपुरा स्थित आस्था वृद्धाश्रम में शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुजुर्गों और दृष्टिहीन बच्चों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान अंताक्षरी में दृष्टिहीन बच्चियों ने अपनी सुरीली आवाज से सबका दिल जीत लिया। उनकी गायकी सुनकर विजयवर्गीय ने मजाकिया अंदाज में कहा- 'ये बच्चियां हमें पटक-पटक मारेगी।' उन्होंने बच्चियों की जमकर तारीफ की और उनका उत्साह बढ़ाया।

दृष्टिहीन बच्चियों की सुरीली गायकी पर झूमे कैलाश विजयवर्गीय, बोले- ये हमें पटक-पटक मारेंगी: आस्था वृद्धाश्रम में बुजुर्गों और बच्चों के साथ मनाई दिवाली, अंताक्षरी में मंत्री की टीम हारी

नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में नि:शक्त बच्चों और वृद्धजनों के साथ मनाई दीपावली. गीत गाए और झूमे

इंदौर। दीपावली का त्योहार खुशियां बांटने और अपनों के साथ समय बिताने का अवसर होता है। लेकिन त्योहार की असली खुशी तब और बढ़ जाती है, जब समाज के उन लोगों के बीच पहुंचकर उनके चेहरों पर मुस्कान लाई जाए, जिन्हें अपनों के साथ और स्नेह की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसी भावना के साथ मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को इंदौर के परदेशीपुरा स्थित आस्था वृद्धाश्रम में बुजुर्गों और दृष्टिहीन बच्चियों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। इस दौरान गीत-संगीत, भजन, अंताक्षरी और हंसी-मजाक के बीच पूरा माहौल उत्साह और अपनत्व से भर गया।

कार्यक्रम में सबसे खास पल उस समय आया, जब दृष्टिहीन बच्चियों ने अंताक्षरी के दौरान अपनी सुरीली आवाज में गीत प्रस्तुत किए। बच्चियों की शानदार गायकी सुनकर वहां मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए। उनकी आवाज और आत्मविश्वास ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बच्चियों के गीत सुनकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक सके। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'ये बच्चियां हमें पटक-पटक मारेंगी।' मंत्री की इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने बच्चियों का उत्साह बढ़ाते हुए उनकी गायकी की जमकर सराहना की।

अंताक्षरी में मंत्री ने भी दिखाया गायकी का हुनर

दिवाली मिलन समारोह में अंताक्षरी का दौर शुरू हुआ तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी पूरे उत्साह के साथ इसमें शामिल हुए। उन्होंने अपनी टीम की ओर से पुराने हिंदी फिल्मी गीत गाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इस दौरान उन्होंने 'रमैया वस्तावैया...' और 'हमें तुमसे प्यार कितना...' जैसे लोकप्रिय गीत सुनाए।

मंत्री के गीतों के बीच दृष्टिहीन बच्चियों और अन्य प्रतिभागियों ने भी एक से बढ़कर एक गाने प्रस्तुत किए। अंताक्षरी में दोनों टीमों के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिला। हालांकि, इस मुकाबले में कैलाश विजयवर्गीय की टीम को हार का सामना करना पड़ा। अनुभूति विद्यालय की गीताजी के नेतृत्व वाली टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की।

हार के बावजूद मंत्री ने पूरे आयोजन का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में हार और जीत का कोई विशेष महत्व नहीं होता। असली खुशी सभी के साथ बैठने, बातचीत करने और मिलकर त्योहार मनाने में है। अंताक्षरी के दौरान बुजुर्गों और बच्चियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

बोले- इनके चेहरों की खुशी ही हमारे पटाखे और मिठाइयां

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दीपावली का वास्तविक आनंद तभी मिलता है, जब हम समाज के जरूरतमंद और बुजुर्ग लोगों के साथ अपनी खुशियां साझा करते हैं। जब तक इन लोगों के बीच आकर त्योहार नहीं मनाया जाता, तब तक दिवाली का उत्साह अधूरा लगता है।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि इन लोगों के चेहरों पर दिखाई देने वाली खुशी ही हमारे लिए पटाखे और मिठाइयां हैं। इनके साथ समय बिताना और इनके चेहरों पर मुस्कान देखना ही त्योहार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि दिवाली केवल रोशनी और सजावट का पर्व नहीं है, बल्कि यह दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने का भी अवसर है।

मंत्री ने अपने पुराने जुड़ाव का जिक्र करते हुए बताया कि वह पिछले 35 से 40 वर्षों से लगातार आस्था वृद्धाश्रम आते रहे हैं। यहां बुजुर्गों और बच्चों के साथ भोजन करना, भजन गाना और अंताक्षरी खेलना उनके लिए हमेशा खास अनुभव रहा है। उन्होंने कहा कि यहां आने पर उन्हें परिवार जैसा अपनापन महसूस होता है। इन लोगों के साथ बिताए गए पल मन को सुकून देते हैं।

35-40 साल से वृद्धाश्रम से जुड़ाव

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आस्था वृद्धाश्रम से उनका रिश्ता कई दशकों पुराना है। समय के साथ यहां आने वाले लोगों और कार्यक्रमों में बदलाव हुआ होगा, लेकिन यहां मिलने वाला स्नेह और अपनापन आज भी वैसा ही है। हर साल दीपावली के अवसर पर यहां आकर बुजुर्गों और दृष्टिहीन बच्चियों के साथ खुशियां साझा करना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें त्योहार के अवसर पर अपनेपन और साथ की जरूरत होती है। यदि हम अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर उनके बीच पहुंचें तो उनके लिए यह किसी बड़े उपहार से कम नहीं होगा। त्योहार की सार्थकता भी इसी में है कि खुशियां केवल अपने परिवार तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचें।

मिट्टी के दीये खरीदें, तभी कुम्हारों के घर भी मनेगी दिवाली

कार्यक्रम के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और 'लोकल फॉर वोकल' अभियान को बढ़ावा देने की अपील भी की। उन्होंने विशेष रूप से मिट्टी के दीये खरीदने पर जोर देते हुए कहा कि दीपावली के अवसर पर स्थानीय कुम्हारों और छोटे व्यापारियों की मेहनत को सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुम्हार पूरे साल मेहनत करके मिट्टी के दीये तैयार करते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि दीपावली के दौरान उनके बनाए दीयों की बिक्री होगी और उनके परिवार में भी त्योहार की खुशियां आएंगी। ऐसे में यदि लोग पारंपरिक मिट्टी के दीयों के स्थान पर प्लास्टिक और मोम से बने दीयों को प्राथमिकता देंगे तो इसका असर स्थानीय कारीगरों की आजीविका पर भी पड़ेगा।

मंत्री ने कहा कि मिट्टी के दीये खरीदना केवल एक परंपरा निभाना नहीं है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का भी माध्यम है। हमारी छोटी-सी खरीदारी किसी कुम्हार के घर में भी खुशियों का दीप जला सकती है।

छोटी खरीदारी से मजबूत होगा स्थानीय कारोबार

विजयवर्गीय ने लोगों से अपील की कि त्योहारों के दौरान बाजार से खरीदारी करते समय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल से छोटे व्यापारियों, कारीगरों और पारंपरिक व्यवसायों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी, तभी इनसे जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर होगी।

उन्होंने 'लोकल फॉर वोकल' को केवल नारा न मानकर इसे अपनी रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बनाने की बात कही। उनके मुताबिक, स्थानीय दुकानदारों से सामान खरीदना और कुम्हारों के बनाए मिट्टी के दीये जलाना भी समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

गीत-संगीत और अपनत्व के बीच यादगार बना आयोजन

आस्था वृद्धाश्रम में आयोजित दीपावली मिलन समारोह में गीत-संगीत, हंसी-मजाक और आत्मीय बातचीत ने उत्सव को खास बना दिया। दृष्टिहीन बच्चियों की शानदार गायकी, बुजुर्गों की सहभागिता और मंत्री की अंताक्षरी ने पूरे आयोजन में उत्साह भर दिया।

कैलाश विजयवर्गीय ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश दिया कि त्योहार की खुशियां बांटने से बढ़ती हैं। जरूरतमंदों, बुजुर्गों और विशेष जरूरत वाले लोगों के साथ कुछ पल बिताना भी दीपावली मनाने का एक सुंदर तरीका है। कार्यक्रम का सबसे यादगार संदेश यही रहा कि असली रोशनी केवल घरों में जलने वाले दीयों से नहीं, बल्कि किसी के चेहरे पर आने वाली मुस्कान से भी फैलती है।