पचमढ़ी में 150 फीट गहरी खाई में गिरने से नागपुर के ग्रुप लीडर की मौत, बंदर से बैग वापस लेने के दौरान हुआ हादसा

पचमढ़ी के प्रियदर्शिनी व्यू प्वाइंट पर एक पर्यटक की 150 फीट गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। नागपुर के शिक्षक विजय नायक बंदर से अपना बैग बचाने की कोशिश में संतुलन खो बैठे और हादसे का शिकार हो गए।

पचमढ़ी में 150 फीट गहरी खाई में गिरने से नागपुर के ग्रुप लीडर की मौत, बंदर से बैग वापस लेने के दौरान हुआ हादसा

हिल स्टेशन पचमढ़ी में बंदर की वजह से गई शख्स की जान, खाई में गिरकर ग्रुप लीडर की मौत, पैसों के बैग छीनने के दौरान हादसा 

पचमढ़ी। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां प्रियदर्शिनी व्यू पॉइंट पर एक बंदर से अपना बैग वापस लेने की कोशिश में नागपुर निवासी ग्रुप लीडर की करीब 150 फीट गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। मृतक की पहचान विजय नायक के रूप में हुई है। वह नागपुर से आए 20 स्कूली बच्चों के दल को भ्रमण कराने के लिए पचमढ़ी पहुंचे थे। उनके साथ उनके पिता भवानी नायक भी मौजूद थे। यह पूरी घटना बच्चों और अन्य पर्यटकों की आंखों के सामने हुई। हादसे के बाद पर्यटन स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और बच्चों में दहशत फैल गई।

जानकारी के अनुसार, नागपुर से शिक्षिका और 20 स्कूली बच्चों का एक दल पचमढ़ी घूमने आया था। इस दल की जिम्मेदारी ग्रुप लीडर विजय नायक संभाल रहे थे। भ्रमण के दौरान सभी लोग प्रियदर्शिनी व्यू पॉइंट पहुंचे थे। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और गहरी घाटियों के मनोरम नजारों के लिए पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां बच्चे और अन्य सदस्य पहाड़ियों के खूबसूरत दृश्यों के बीच तस्वीरें खिंचवा रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक बंदर की हरकत ने खुशियों भरे भ्रमण को मातम में बदल दिया।

बताया गया कि विजय नायक के पास एक बैग रखा हुआ था, जिसमें जरूरी पैसे और कागजात मौजूद थे। इसी दौरान एक बंदर अचानक बैग उठाकर भाग गया। बंदर बैग लेकर व्यू पॉइंट पर लगी रेलिंग के पास जाकर बैठ गया। विजय ने पहले उसे भगाने की कोशिश की, लेकिन बंदर बैग छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। मौके पर मौजूद बच्चों और दूसरे पर्यटकों ने भी शोर मचाकर बंदर को डराने का प्रयास किया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ।

इसके बाद विजय नायक बैग वापस लेने के लिए बंदर के पास पहुंचे। उन्होंने बंदर के हाथ से बैग पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींचने लगे। इसी दौरान बंदर और विजय के बीच बैग को लेकर खींचतान होने लगी। रेलिंग के पास संतुलन बिगड़ने से विजय का पैर फिसल गया और वह रेलिंग के पार होते हुए सीधे करीब 150 फीट गहरी खाई में जा गिरे। अचानक हुए इस हादसे को देखकर वहां मौजूद लोग घबरा गए। किसी को भी संभलने या उन्हें बचाने का मौका नहीं मिल सका।

बच्चों के सामने हुआ हादसा, पिता की आंखों के सामने उजड़ गई दुनिया

इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी शिक्षिका ने बताया कि उनका दल नागपुर से 20 बच्चों के साथ पचमढ़ी घूमने आया था। ग्रुप का नेतृत्व विजय नायक कर रहे थे और उनके पिता भवानी नायक भी साथ थे। सभी लोग प्रियदर्शिनी व्यू पॉइंट पर घूम रहे थे। बच्चे वहां फोटो खिंचवा रहे थे। इसी बीच बंदर ने विजय का बैग उठा लिया। बैग में जरूरी पैसे और कागजात रखे थे। विजय ने बंदर से बैग वापस लेने की कोशिश की, लेकिन रेलिंग के पास संतुलन बिगड़ने के कारण उनका पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में गिर गए।

वहीं मृतक के पिता भवानी नायक ने बताया कि विजय के पास रखा बैग बंदर अचानक उठाकर ले गया था। वह बैग लेकर भागने लगा और फिर रेलिंग के पास बैठ गया। विजय ने जब उससे बैग वापस लेने की कोशिश की तो उनका पैर फिसल गया। देखते ही देखते वह खाई में गिर गए। भवानी नायक के मुताबिक, यह पूरी घटना उनकी आंखों के सामने हुई, लेकिन वह चाहकर भी अपने बेटे को बचा नहीं सके। बेटे को अपनी आंखों के सामने खाई में गिरते देख परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

चार घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, तीन किलोमीटर पैदल पहुंचे बचाव दल

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे। खाई काफी गहरी और दुर्गम होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य आसान नहीं था। पुलिस और स्थानीय लोगों की टीम ने नीचे उतरकर विजय नायक की तलाश शुरू की। खाई में उतरने के बाद शव तक पहुंचने के लिए बचाव दल को करीब तीन किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, यह हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ था। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब 11 बजे तक बचाव कार्य जारी रहा। लगभग चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम शव को खाई से बाहर निकालने में सफल हुई। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद बच्चों, शिक्षिका और मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

पचमढ़ी थाना प्रभारी गोपाल घासले ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम और स्थानीय लोगों की सहायता से खाई में उतरकर रेस्क्यू किया गया। करीब 150 फीट गहरी खाई में पहुंचने और शव को बाहर निकालने में काफी कठिनाई हुई। टीम को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद शव बाहर निकाला गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव लेकर नागपुर रवाना हो गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पचमढ़ी में बंदरों का आतंक, पर्यटकों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद पचमढ़ी के पर्यटन स्थलों पर बंदरों के बढ़ते आतंक और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पचमढ़ी के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदर पर्यटकों के हाथों से खाने-पीने की चीजें, बैग और अन्य सामान छीनने की कोशिश करते हैं। कई बार पर्यटक उन्हें भगाने या अपना सामान वापस लेने के प्रयास में चोटिल भी हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पचमढ़ी में बंदरों के हमलों और उनसे बचने की कोशिश में घायल होने वाले पर्यटकों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका दावा है कि प्रतिदिन करीब 5 से 10 पर्यटक बंदरों से जुड़ी घटनाओं में घायल होकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। इसके बावजूद पर्यटन स्थलों पर बंदरों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

लोगों का आरोप है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। पर्यटक स्थलों पर बंदरों के व्यवहार को नियंत्रित करने, पर्यटकों को जागरूक करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाओं की जरूरत है।

कमजोर रेलिंग और सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल

प्रियदर्शिनी व्यू पॉइंट पर हुए हादसे के बाद वहां लगी रेलिंग की मजबूती को लेकर भी स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि गहरी खाई के किनारे बने व्यू पॉइंट पर पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। रेलिंग मजबूत होने के साथ-साथ उसकी नियमित जांच भी जरूरी है। जहां जोखिम अधिक है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा अवरोध और चेतावनी बोर्ड लगाए जाने चाहिए।

पचमढ़ी में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंचते हैं। परिवारों के साथ आने वाले पर्यटकों में स्कूली दल और बच्चों के समूह भी शामिल रहते हैं। ऐसे में पर्यटन स्थलों पर बंदरों की गतिविधियों और खाई के किनारे सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी गंभीर खतरा बन सकती है।

इस घटना ने एक परिवार की खुशियां छीनने के साथ ही पर्यटन स्थलों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरत है कि प्रशासन, वन विभाग और पर्यटन प्रबंधन मिलकर बंदरों के आतंक पर नियंत्रण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाएं। साथ ही खतरनाक स्थानों पर रेलिंग की जांच, सुरक्षा इंतजाम और पर्यटकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश सुनिश्चित किए जाएं, ताकि घूमने आए किसी दूसरे परिवार को इस तरह के दर्दनाक हादसे का सामना न करना पड़े।