भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटे कर्मचारी; शहर में फिर शुरू हुआ सफाई अभियान

अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के तत्वावधान में तीन नवंबर से जारी सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल शुक्रवार देर रात समाप्त हुई।

भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटे कर्मचारी; शहर में फिर शुरू हुआ सफाई अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सकारात्मक वार्ता के बाद सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। सीएम ने कर्मचारियों के नियमितीकरण, वेतन वृद्धि सहित प्रमुख मांगों पर कार्रवाई के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आश्वासन दिया है।

भोपाल। राजधानी भोपाल में पिछले तीन दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई बैठक और कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर मिले ठोस आश्वासन के बाद अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन ने शुक्रवार देर शाम आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया। हड़ताल खत्म होने के साथ ही सफाई कर्मचारियों ने काम संभाल लिया और शहर में रात्रिकालीन सफाई अभियान शुरू कर दिया गया। इससे दीपावली और धनतेरस के दौरान सफाई व्यवस्था को लेकर बनी चिंता के बीच नगरवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

तीन नवंबर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सफाई कर्मचारियों के काम बंद करने से राजधानी की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। शहर के कई इलाकों में नियमित कचरा संग्रहण बंद होने के कारण सड़कों, बाजारों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर जमा होने लगे थे। कई स्थानों पर गंदगी और दुर्गंध की स्थिति बनने से स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। त्योहारों के दौरान बाजारों में बढ़ती भीड़ और सफाई व्यवस्था पर पड़ते असर को देखते हुए प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई थी।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई बातचीत के बाद कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने का रास्ता साफ हुआ। यूनियन ने सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को सकारात्मक बताते हुए आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। इसके बाद सफाई कर्मचारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए गए और नगर निगम ने शहर में सफाई व्यवस्था बहाल करने की तैयारी शुरू कर दी।

मुख्यमंत्री निवास पहुंचा सफाई कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल

सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल राज्य मंत्री कृष्णा गौर के साथ मुख्यमंत्री निवास पहुंचा। यहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ प्रतिनिधियों की विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में कर्मचारियों ने लंबे समय से लंबित नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए।

अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने बताया कि मुख्यमंत्री के सामने कर्मचारियों की समस्याओं को विस्तार से रखा गया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कई कर्मचारी वर्षों से दैनिक वेतन भोगी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक स्थिति और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े कई विषय लंबे समय से लंबित हैं। नियमितीकरण और उचित वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अनुकंपा नियुक्ति मिलने में भी समस्याएं आती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित मांगों पर कार्रवाई के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। सरकार की ओर से एक महीने के भीतर चार प्रमुख मांगों पर प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया। इसी बातचीत के बाद यूनियन ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।

नियमितीकरण से लेकर वेतन वृद्धि तक, इन मांगों पर बनी सहमति

बैठक में सफाई कर्मचारियों की सेवा शर्तों और आर्थिक स्थिति में सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सकारात्मक निर्णय सामने आए। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को लेकर निम्नलिखित आश्वासन दिए गए हैं।

1. विनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की मांग

यूनियन की प्रमुख मांग विनियमित सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की रही है। लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई गई। सरकार की ओर से इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया।

2. दस साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों का विनियमितीकरण

दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के संबंध में भी महत्वपूर्ण आश्वासन मिला है। जिन कर्मचारियों की सेवा अवधि दस वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें विनियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था में काम कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

3. कर्मचारियों के मासिक वेतन में बढ़ोतरी

जिन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा अवधि दस वर्ष की निर्धारित सीमा में नहीं आती है, उनके वेतन में भी बढ़ोतरी का आश्वासन दिया गया है। ऐसे कर्मचारियों का मासिक वेतन बढ़ाकर 18 से 19 हजार रुपये किए जाने की बात कही गई है। इस निर्णय से कम वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है।

4. दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति

बैठक में अनुकंपा नियुक्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन ने मांग की कि सेवा के दौरान दिवंगत होने वाले सफाई कर्मचारियों के पति या पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि परिवार की आजीविका प्रभावित न हो। सरकार की ओर से इस मांग पर भी सकारात्मक आश्वासन दिया गया।

5. ठेका प्रथा समाप्त करने के लिए प्रस्ताव

सफाई कर्मचारियों ने ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग भी रखी। यूनियन का कहना है कि ठेका व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से जुड़ी परेशानियां होती हैं। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग को विधिवत प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया गया है। इसके बाद विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

उच्चस्तरीय कमेटी करेगी मांगों पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय उच्चस्तरीय कमेटी के गठन का रहा। यह कमेटी सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों से जुड़े विषयों का परीक्षण करेगी और निर्धारित समयसीमा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। सरकार की ओर से एक महीने के भीतर चार प्रमुख मांगों पर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

यूनियन के पदाधिकारियों का मानना है कि सरकार की ओर से मिले आश्वासन कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। हालांकि, कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं का समाधान संबंधित निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

तीन दिन की हड़ताल से बिगड़ी राजधानी की सफाई व्यवस्था

भोपाल में तीन नवंबर से शुरू हुई हड़ताल का असर धीरे-धीरे शहर के अलग-अलग इलाकों में दिखाई देने लगा था। सफाई कर्मचारियों के काम बंद करने से कचरा उठाने वाली व्यवस्था प्रभावित हुई। घरों से निकलने वाला कचरा निर्धारित स्थानों पर जमा होने लगा। बाजारों और प्रमुख मार्गों के आसपास भी गंदगी बढ़ने लगी थी।

त्योहारों के समय बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने से सफाई व्यवस्था का महत्व और अधिक हो गया था। धनतेरस और दीपावली के दौरान दुकानों, व्यावसायिक क्षेत्रों और आवासीय इलाकों में बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। ऐसे समय में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से नागरिकों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

हड़ताल समाप्त होने के बाद अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमा कचरे को हटाकर शहर को साफ-सुथरा बनाना है। इसी दिशा में शुक्रवार देर रात से रात्रिकालीन सफाई अभियान शुरू कर दिया गया। कर्मचारियों के वापस काम पर लौटने से कचरा संग्रहण और सफाई कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

शनिवार से सामान्य हो सकती है सफाई व्यवस्था

हड़ताल समाप्त होने के बाद राजधानी के नागरिकों को राहत मिलने की संभावना है। नगर निगम की ओर से सफाई अभियान शुरू किए जाने के बाद शनिवार से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया जाएगा। जिन इलाकों में कचरे का अधिक जमाव हुआ है, वहां विशेष अभियान चलाकर सफाई कराई जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में सफाई कर्मचारियों की मांगों और शहर की बुनियादी व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने आई। मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद फिलहाल आंदोलन समाप्त हो गया है और कर्मचारी अपने काम पर लौट आए हैं।

अब कर्मचारियों की निगाहें सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं। नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसे मुद्दों पर गठित कमेटी की कार्रवाई आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगी। यदि तय समयसीमा में इन मांगों पर ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे सफाई कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

फिलहाल हड़ताल खत्म होने से भोपाल की सफाई व्यवस्था को राहत मिली है। शहर में सफाई अभियान दोबारा शुरू हो चुका है और अब प्रशासन के सामने जमा कचरे को हटाकर राजधानी को स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी है।