अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड के पास डस्टबिन में मिला 1.7 किलो का मृत भ्रूण, CCTV में कैद हुई महिला की संदिग्ध हरकत

सतना का जिला अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अस्पताल के एक डस्टबिन से एक डेढ़ किलोग्राम से ज्यादा का मृत भ्रूण मिला है. भ्रूण को डस्टबिन में डालने वाली महिला की पहचान सीसीटीवी के आधार पर की गई है. महिला ने पूछताछ के दौरान हैरान करने वाला खुलासा किया है. अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की हाई लेवेल की जांच कर रहा है.

अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड के पास डस्टबिन में मिला 1.7 किलो का मृत भ्रूण, CCTV में कैद हुई महिला की संदिग्ध हरकत

मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अस्पताल प्रबंधन को भी सकते में डाल दिया। मैटरनिटी विंग के सोनोग्राफी सेंटर के पास कूड़ेदान में करीब 7 माह का मृत भ्रूण मिला। रात डेढ़ बजे एक संदिग्ध महिला CCTV कैमरे में कुछ फेंकते दिखाई दी। अब DNA जांच से मामले की कड़ियां जोड़ने की तैयारी है।

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल की मेटरनिटी विंग के पास रखे डस्टबिन में करीब 1.7 किलोग्राम वजन का मृत भ्रूण मिलने से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। गुरुवार सुबह सफाई के दौरान जब कर्मचारियों की नजर डस्टबिन में पड़े भ्रूण पर पड़ी तो इसकी सूचना तत्काल अस्पताल प्रबंधन को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। फुटेज में एक संदिग्ध महिला रात के समय डस्टबिन के पास पहुंचकर उसमें कुछ फेंकती दिखाई दी। शुरुआती कैमरे में महिला ने अपना चेहरा कपड़े से ढंक रखा था, जबकि आगे लगे दूसरे कैमरे में उसका चेहरा स्पष्ट दिखाई देने की जानकारी सामने आई है।

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। भ्रूण को सुरक्षित रखने के लिए मर्चुरी के डीप फ्रीजर में रखवाया गया है। अब DNA परीक्षण के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बरामद भ्रूण का जैविक संबंध CCTV में दिखाई देने वाली संदिग्ध महिला से है या नहीं। फिलहाल इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, प्रसूति वार्ड की निगरानी और नवजात से संबंधित संवेदनशील मामलों के प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

गर्भपात की जानकारी मिलने पर डॉक्टर को हुआ संदेह

जानकारी के मुताबिक, पन्ना जिले के सलेहा क्षेत्र से एक प्रसूता को देर रात सतना जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में भर्ती कराया गया था। महिला के साथ आए परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर हर्षा भठीजा को बताया कि महिला का गर्भपात हो गया है और गर्भनाल गर्भाशय के अंदर फंसी हुई है। परिजनों की ओर से गर्भ की अवधि लगभग तीन महीने बताई गई थी।

इसके बाद डॉक्टर ने चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत गर्भनाल को बाहर निकाला। इसी दौरान उन्हें मामले को लेकर संदेह हुआ। डॉक्टर को लगा कि गर्भनाल की स्थिति और उसकी बनावट तीन महीने के गर्भ से मेल नहीं खा रही है। उन्हें आशंका हुई कि यह अधिक विकसित गर्भ से संबंधित हो सकती है।

हालांकि, डॉक्टर की ओर से संदेह जताए जाने के बावजूद परिजन गर्भ की अवधि तीन महीने ही बताते रहे। इसी बीच अस्पताल में हुई आगे की घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। सुबह डस्टबिन में मृत भ्रूण मिलने के बाद डॉक्टर की आशंका और अस्पताल में भर्ती महिला से जुड़े घटनाक्रम को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।

रात करीब डेढ़ बजे डस्टबिन के पास पहुंची महिला

अस्पताल परिसर में भ्रूण मिलने के बाद प्रबंधन ने संबंधित क्षेत्र के CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच शुरू की। फुटेज में रात करीब डेढ़ बजे एक महिला डस्टबिन के पास पहुंचती दिखाई दी। महिला ने अपने चेहरे को कपड़े से ढंक रखा था। वह डस्टबिन के पास कुछ देर रुकती है और उसमें कोई वस्तु डालकर वहां से चली जाती है।

इसके बाद दूसरे कैमरे की रिकॉर्डिंग भी देखी गई। बताया गया है कि आगे लगे कैमरे में महिला का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। CCTV फुटेज के आधार पर अस्पताल प्रबंधन ने संदिग्ध महिला की पहचान कर उससे पूछताछ की।

हालांकि, पूछताछ के दौरान महिला ने डस्टबिन में मिले भ्रूण को अपना मानने से इनकार कर दिया। ऐसे में केवल CCTV फुटेज के आधार पर भ्रूण की पहचान या महिला के साथ उसके जैविक संबंध को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। अस्पताल प्रशासन अब DNA परीक्षण के जरिए इस मामले की वास्तविकता सामने लाने की तैयारी कर रहा है।

सात माह के भ्रूण का दावा, वजन करीब 1.7 किलो

जिला अस्पताल के सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेंद्र वर्मा के मुताबिक, सोनोग्राफी सेंटर के पास रखी डस्टबिन में करीब सात माह का मृत भ्रूण मिला है। उसका वजन लगभग 1.7 किलोग्राम बताया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने भ्रूण को सुरक्षित रखवाने की व्यवस्था की।

मामले की जांच में आरएमओ डॉ. अभिनव चौरसिया और सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेंद्र वर्मा भी जुटे हुए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि CCTV फुटेज में एक संदिग्ध महिला की पहचान हुई है। अब भ्रूण और संबंधित महिला के DNA सैंपल की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बरामद भ्रूण का उस महिला से कोई जैविक संबंध है या नहीं।

डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया भ्रूण

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने भ्रूण को मर्चुरी में डीप फ्रीजर के अंदर सुरक्षित रखवा दिया है, ताकि जांच से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके। DNA परीक्षण इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

दरअसल, भ्रूण मिलने से पहले अस्पताल में एक महिला को गर्भपात की जानकारी देकर भर्ती कराया गया था। परिजनों ने गर्भ की अवधि तीन महीने बताई थी, जबकि चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर को गर्भ की अवधि अधिक होने का संदेह हुआ। इसके बाद रात में CCTV फुटेज में महिला की संदिग्ध गतिविधि सामने आने से दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध की जांच की जा रही है।

अस्पताल प्रबंधन के सामने अब यह पता लगाना जरूरी है कि डस्टबिन में भ्रूण किसने रखा और किन परिस्थितियों में उसे वहां छोड़ा गया। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि अस्पताल में भर्ती महिला और बरामद भ्रूण के बीच कोई संबंध है या नहीं।

जांच में सामने आएंगे घटना से जुड़े अहम तथ्य

इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब जांच और DNA रिपोर्ट के बाद ही मिल सकेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि डस्टबिन में मिला मृत भ्रूण वास्तव में किसका है? क्या CCTV में दिखाई देने वाली महिला का उससे कोई संबंध है या फिर इस घटना में कोई अन्य व्यक्ति शामिल है?

इसके अलावा गर्भ की अवधि को लेकर परिजनों की ओर से दी गई जानकारी और डॉक्टर को हुए संदेह के बीच अंतर की भी जांच की जा रही है। रात करीब डेढ़ बजे महिला के डस्टबिन तक पहुंचने और वहां कुछ फेंकने की गतिविधि भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।

अस्पताल प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि घटना अस्पताल की मेटरनिटी विंग और सोनोग्राफी सेंटर के पास हुई है। ऐसे में अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, संबंधित मरीजों का चिकित्सकीय रिकॉर्ड और पूछताछ से मिलने वाली जानकारी को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल भ्रूण को सुरक्षित रखा गया है और DNA परीक्षण की प्रक्रिया के जरिए उसकी पहचान से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मृत भ्रूण किसका था, उसे डस्टबिन में किसने रखा और इस घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। तब तक इस मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।